
प्रशासनिक गलियारों में कभी-कभी ऐसी स्थितियां बन जाती हैं जहाँ ‘बुराई’ भी ‘अच्छाई’ लगने लगती है। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला एक ‘मलाईदार’ विभाग में, जहाँ प्रमुख सचिव (PS) के वापस लौटते ही अधिकारियों और कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे हैं।
दरअसल, इस विभाग के प्रमुख सचिव अपने मातहतों के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे। लेकिन कहते हैं न कि “पुराना बॉस ही बेहतर लगता है”, यह कहावत यहाँ बिल्कुल सटीक बैठी। मामला तब शुरू हुआ जब प्रमुख सचिव ट्रेनिंग पर गए और विभाग का अतिरिक्त प्रभार एक ‘तेज-तर्रार’ एसीएस (ACS) मैडम को सौंप दिया गया।
मैडम के कड़े तेवर: प्रभार मिलते ही एसीएस मैडम ने स्पष्ट कर दिया कि वे इस विभाग की फाइलों पर काम नहीं करेंगी।
कामकाज हुआ ठप: नतीजा यह हुआ कि विभाग की गाड़ी पटरी से उतर गई। कई महत्वपूर्ण फाइलें अटक गईं और विकास कार्य रुकने लगे।
कर्मचारियों की बेबसी: विभाग के कर्मचारी इस कदर परेशान हुए कि उन्हें अपने पुराने बॉस की याद सताने लगी। कर्मचारियों का कहना था कि पुराने साहब जैसे भी थे, कम से कम काम तो नहीं रोकते थे। जबकि मैडम के सख्त व्यवहार के कारण कोई उनके पास जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा था।
अब जब प्रमुख सचिव अपनी ट्रेनिंग पूरी कर वापस लौट आए हैं, तो पूरे विभाग ने राहत की सांस ली है। फाइलों की धूल फिर से झड़ने लगी है और गलियारों में एक बार फिर पुराने ढर्रे पर काम शुरू हो गया है।
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