
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में मौसम के बदले मिजाज ने अन्नदाताओं को तोड़ कर रख दिया। शहर में जहां हल्की बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई, वहीं कुछ ग्रामीण अंचलों में हुई बारिश किसानों के लिए आफत बनकर बरसी है। इस बेमौसम बरसात ने न केवल खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि अनाज मंडियों के कुप्रबंधन को भी उजागर कर दिया है।
खुले में तैरता दिखा ‘मेहनत का अनाज’
सबसे दुखद तस्वीरें गढ़ाकोटा से सामने आई। यहां कृषि उपज मंडी में अपनी फसल बेचने आए किसानों की गेहूं और चने की उपज बारिश के पानी में पूरी तरह भीग गई। मंडी में पर्याप्त शेड और सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण, खुले आसमान के नीचे रखा सैकड़ों क्विंटल अनाज गीला हो गया।
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मंडी परिसर में ड्रेनेज और कवरिंग की व्यवस्था न होने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है।
खेतों में कटी फसलों पर संकट
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटाई का काम जोरों पर है। बारिश के चलते कुछ जगह खेतों में कटी रखी फसलें पानी में डूब गईं, जिससे दाना काला पड़ने और सड़ने की आशंका बढ़ गई । खड़ी फसलों के जमीन पर गिरने से पैदावार की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर असर पड़ सकता है। नमी बढ़ने के कारण अब फसलों की थ्रेसिंग में भी देरी होगी।
किसानों में बढ़ता आक्रोश और चिंता
अचानक हुए इस नुकसान से किसान हताश हैं। गढ़ाकोटा के किसानों का कहना है कि वे हर बार अपनी उपज को सुरक्षित रखने की गुहार लगाते हैं, लेकिन मंडी प्रबंधन की उदासीनता की वजह से उन्हें बार-बार यह ‘मानव निर्मित’ त्रासदी झेलनी पड़ती है।
“हमने अपना खून-पसीना एक करके फसल उगाई थी। मंडी में अनाज लाए ताकि कर्ज चुका सकें, लेकिन यहाँ की अव्यवस्था ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब भीगा हुआ अनाज न तो अच्छे दाम पर बिकेगा और न ही रखने लायक बचेगा।” — एक पीड़ित किसान
किसानों की मांग
वर्तमान स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग को तुरंत सक्रिय होने की आवश्यकता है। किसानों ने मांग की है कि-
- बारिश से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए।
- मंडी में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा दिया जाए।
- भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए मंडियों में पक्के शेड और ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जाए।
ब्युरो रिपोर्ट : मनिष कुमार चौबे
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