
मैहर| में विकास को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मैहर विकास जमीनी हकीकत के तहत शहर और गांव दोनों जगहों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है। कागजों में योजनाएं पूरी बताई जा रही हैं, लेकिन जमीन पर हालात अलग कहानी बयां कर रहे हैं। पानी, बिजली और सड़क जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए लोग अब भी संघर्ष कर रहे हैं।
पानी-बिजली और सड़कों की समस्या
मैहर में गर्मी बढ़ते ही पेयजल संकट गहराने लगता है। कई इलाकों में नल-जल योजना के बोर्ड लगे हैं, लेकिन नलों से पानी नहीं आता। गांवों में हैंडपंप खराब पड़े हैं और महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। बिजली व्यवस्था भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अघोषित कटौती और कम वोल्टेज के कारण किसानों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। छात्रों की पढ़ाई और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
सड़कों की स्थिति भी खराब है। ओवरलोड वाहनों की वजह से सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। साथ ही उद्योगों से निकलने वाली धूल और धुआं पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।
शिकायत व्यवस्था और प्रशासनिक चुनौती
शिकायत निवारण व्यवस्था भी लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है। कई बार शिकायत दर्ज होने के बाद बिना समाधान के ही प्रकरण बंद कर दिए जाते हैं। इससे लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। जनसुनवाई में भी लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन समाधान समय पर नहीं मिलता। प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी महसूस की जा रही है।
स्थानीय पत्रकार लगातार इन मुद्दों को उठाते रहे हैं, लेकिन उन्हें कई बार दबाव का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे जनता की आवाज बनकर काम कर रहे हैं।
मैहर में विकास की असली तस्वीर अब सामने आने लगी है। लोगों की उम्मीद है कि प्रशासन जमीनी स्तर पर काम करेगा और समस्याओं का समाधान करेगा। विकास तभी सार्थक होगा जब उसका लाभ हर नागरिक तक पहुंचे।
ब्यूरो रिपोर्ट: देवेश शर्मा
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