
लखनऊ, 1 मई : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले महिला सुरक्षा एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा माना जाता था, जहां अपराध की घटनाओं को लेकर प्रदेश की छवि राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावित रही। लेकिन बीते 9 वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर कई बड़े और ठोस कदम उठाए गए हैं, जिनका असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के बीच सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है और अपराधियों में कानून का डर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
लखनऊ: योगी सरकार के कार्यकाल में महिला अपराधों पर नियंत्रण के लिए त्वरित न्याय व्यवस्था को मजबूत किया गया है। मामलों की सुनवाई में तेजी लाई गई है ताकि किसी भी पीड़िता को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। इस बदलाव को केवल नीतिगत नहीं बल्कि व्यवहारिक स्तर पर भी देखा जा सकता है। बीट पुलिसिंग, मिशन शक्ति अभियान, पिंक बूथ, एंटी रोमियो स्क्वाड और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं ने महिला सुरक्षा को नई दिशा दी है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और न्याय व्यवस्था में बदलाव
योगी सरकार के पिछले 9 वर्षों में 218 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTST) की स्थापना की गई है, जिनके माध्यम से बलात्कार और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में तेजी से सुनवाई सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही 75 जिलों में पॉक्सो विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं, जिनका लक्ष्य 6 महीने के भीतर मामलों का निस्तारण करना है। यह व्यवस्था महिला अपराधों में न्याय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मिशन शक्ति और पुलिसिंग में सुधार
वर्ष 2020 से शुरू किए गए मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को एक एकीकृत अभियान के रूप में लागू किया गया है। इसके अंतर्गत करीब 40 हजार पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे महिला संबंधी अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई कर सकें। इसके अलावा 2017 में शुरू किए गए ऑपरेशन शक्ति के तहत छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामलों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
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हेल्पलाइन और शिकायत निस्तारण व्यवस्था मजबूत
महिला हेल्पलाइन 1090 के माध्यम से अब तक 5 करोड़ से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। इस प्रणाली ने महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही इस हेल्पलाइन के जरिए एफआईआर दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे शिकायत प्रक्रिया और आसान हो गई है।
पुलिस ढांचे में नए प्रयोग
योगी सरकार के कार्यकाल में पहली बार महिला पुलिस थानों की स्थापना की गई, और हर जिले में कम से कम एक महिला थाना संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन कर सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक इन टीमों ने बड़े स्तर पर चेकिंग अभियान चलाकर हजारों मामलों में कार्रवाई की है।
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पिंक बूथ और सेफ सिटी प्रोजेक्ट
महिला सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 2500 से अधिक पिंक बूथ और आउटपोस्ट स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा पिंक पेट्रोलिंग (दो और चार पहिया वाहनों से निगरानी) की शुरुआत की गई है। लखनऊ सहित कई जिलों में सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत हजारों सीसीटीवी कैमरों से निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे महिलाओं की सुरक्षा में तकनीक का भी उपयोग सुनिश्चित हुआ है।
न्याय प्रक्रिया में सुधार
सरकार की नीति के अनुसार केवल अपराध दर्ज करना ही नहीं बल्कि दोषियों को सजा दिलाना भी प्राथमिकता है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2012 में जहां चार्जशीट दर 58.3 प्रतिशत थी, वह बढ़कर 2022 में 76.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं दोषसिद्धि दर भी 17.2 प्रतिशत से बढ़कर 27.8 प्रतिशत हो गई है। साथ ही महिला अपराध मामलों में लंबितता भी काफी कम हुई है।
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