
बैतूल: रेलवे स्टेशनों की साफ-सफाई पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी हकीकत काफी चिंताजनक बनी हुई है। बैतूल रेलवे स्टेशन, जिसे आईएसओ प्रमाणपत्र प्राप्त है और अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल किया गया है, वहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई नजर आ रही है।
स्टेशन परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर, सड़ा हुआ खाद्य पदार्थ और प्लास्टिक कचरा फैला हुआ है। बदबू और गंदगी के कारण यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर बैठना और इंतजार करना मुश्किल हो रहा है। यात्री खुलेआम गंदगी के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है। जबकि सफाई ठेके पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उसका असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है।नियमों के अनुसार स्टेशन पर दिन में दो बार सफाई होनी चाहिए, लेकिन आरोप है कि ठेकेदार कर्मचारियों की कमी का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बच रहा है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर रेलवे प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। सरकार द्वारा रेलवे को स्वच्छ और आधुनिक बनाने के लिए भारी बजट दिया जा रहा है, लेकिन बैतूल स्टेशन की स्थिति व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है।
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