
मैहर: इन दिनों जिले में “सड़क सुरक्षा सप्ताह” पूरे जोर-शोर से मनाया जा रहा है। सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई है, चौराहों पर सख्ती दिखाई दे रही है और दोपहिया वाहन चालकों के लगातार चालान काटे जा रहे हैं। लेकिन इसी बीच सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह अभियान वास्तव में सड़क सुरक्षा बढ़ा रहा है या केवल चालान वसूली तक सीमित रह गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभियान के दौरान जागरूकता से ज्यादा कार्रवाई दिखाई दे रही है। हेलमेट को जीवन रक्षक उपकरण की बजाय “चालान से बचने का साधन” माना जा रहा है। कई वाहन चालक केवल पुलिस की मौजूदगी में ही हेलमेट पहनते नजर आते हैं, जो जागरूकता की कमी को दर्शाता है।
सड़क सुरक्षा का असली उद्देश्य लोगों की सोच में बदलाव लाना होना चाहिए, न कि केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित रहना। चालान काटने के बाद भी कई वाहन चालक अगले दिन फिर बिना हेलमेट सड़क पर नजर आते हैं, जिससे अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
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