‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, बोले- बच्चों को सिखाती है झूठ

कानपुर| में आयोजित एक कार्यक्रम में योगेंद्र उपाध्याय के बयान ने नई बहस छेड़ दी। जॉनी जॉनी यस पापा विवाद पर बोलते हुए उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों की लोकप्रिय अंग्रेजी कविता भारतीय संस्कार नहीं सिखाती, बल्कि झूठ बोलने की आदत को बढ़ावा देती है। उनके इस बयान के बाद शिक्षा और संस्कृति को लेकर सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक जगत तक चर्चा तेज हो गई है।

मंत्री बोले- हिंदी कविताओं में छिपे हैं संस्कार

कानपुर में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह के दौरान मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आज बच्चों को केवल भाषा नहीं बल्कि जीवन मूल्य सिखाने की जरूरत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ जैसी कविताएं बच्चों को झूठ बोलने की प्रवृत्ति की ओर ले जाती हैं। मंत्री ने एक अन्य अंग्रेजी कविता का भी जिक्र किया और कहा कि पश्चिमी कविताएं कई बार केवल व्यक्तिगत सुख की बात करती हैं, जबकि भारतीय परंपरा समाज और सामूहिक हित को प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि पुरानी हिंदी कविताएं बच्चों को नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देती थीं।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि की जानकारी भी दी। सरकार ने मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये करने की घोषणा की है। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले। कई लोगों ने भारतीय संस्कृति और शिक्षा में मूल्यों के महत्व पर जोर दिया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अनावश्यक विवाद बताया।

विशेषज्ञों ने बयान पर जताई अलग राय

मंत्री के बयान पर शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर ने कहा कि बच्चों की कविताओं को हमेशा नैतिक शिक्षा के नजरिए से देखना जरूरी नहीं है। कुछ कविताएं केवल मनोरंजन और भाषा सीखने के उद्देश्य से भी बनाई जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में खेल, हास्य और संवाद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ जैसी कविताएं बच्चे और अभिभावक के बीच सामान्य बातचीत को दर्शाती हैं और जवाबदेही का भाव भी सिखाती हैं।
यह कविता वर्तमान में कई स्कूलों और Central Board of Secondary Education से जुड़े प्री-स्कूल पाठ्यक्रमों में शामिल है। हालांकि यह राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय और विदेशी दोनों तरह की कविताओं का संतुलित उपयोग बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहतर हो सकता है। वहीं कुछ अभिभावकों ने भी कहा कि शिक्षा में संस्कार और मनोरंजन दोनों जरूरी हैं।

योगेंद्र उपाध्याय के बयान ने शिक्षा और संस्कारों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। एक ओर भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ बच्चों की रचनात्मक और मनोरंजक शिक्षा को भी जरूरी बता रहे हैं। आने वाले समय में यह चर्चा और तेज हो सकती है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में किस तरह की सामग्री को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

  • yogendra-upadhyay-johnny-johnny-poem-controversy
Srota Swati Tripathy

Srota Swati Tripathy

Related Posts

सागर पुलिस की ‘सृजन संवाद’ पहल, विद्यार्थियों को कानून और साइबर सुरक्षा की दी जानकारी

सागर/ मनीष कुमार चौबे: विद्यार्थियों को कानून, महिला सुरक्षा,…

आगे पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

छिंदवाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जन विश्वास अभियान का करेंगे शुभारंभ

छिंदवाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जन विश्वास अभियान का करेंगे शुभारंभ

एमपी में आज से जनविश्वास अभियान शुरू, हर शुक्रवार फील्ड में उतरेंगे अफसर

एमपी में आज से जनविश्वास अभियान शुरू, हर शुक्रवार फील्ड में उतरेंगे अफसर

झारखंड: प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, सीबीआई जांच की मांग के साथ सड़क से सदन तक आंदोलन का ऐलान

झारखंड: प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, सीबीआई जांच की मांग के साथ सड़क से सदन तक आंदोलन का ऐलान

मध्य प्रदेश पर बढ़ता कर्ज: शिवराज सरकार की योजनाओं की विरासत या मोहन यादव सरकार की आर्थिक चुनौती?

मध्य प्रदेश पर बढ़ता कर्ज: शिवराज सरकार की योजनाओं की विरासत या मोहन यादव सरकार की आर्थिक चुनौती?

Plastic Notes in India: क्या प्लास्टिक नोट आने से फिर होगी नोटबंदी? जानिए RBI का पूरा प्लान, फायदे, नुकसान और आपके लिए क्या बदलेगा

Plastic Notes in India: क्या प्लास्टिक नोट आने से फिर होगी नोटबंदी? जानिए RBI का पूरा प्लान, फायदे, नुकसान और आपके लिए क्या बदलेगा