
नई दिल्ली: केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने साइबर-सक्षम वित्तीय धोखाधड़ियों से निपटने और बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में म्यूल खातों (Mule Accounts) पर नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस MoU का उद्देश्य धोखाधड़ी-जोखिम खुफिया जानकारी साझा करना, विश्लेषणात्मक सहायता प्रदान करना और परिचालन समन्वय को मजबूत करना है, ताकि साइबर धोखाधड़ी की पहचान पहले ही चरण में की जा सके और रोकथाम प्रणाली को प्रभावी बनाया जा सके।
AI आधारित सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा
इस समझौते के तहत I4C की Suspect Registry से प्राप्त डेटा को AI-संचालित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम में उपयोग किया जाएगा। इससे छिपे हुए म्यूल खातों की तेजी से पहचान और उन्हें खत्म करने में मदद मिलेगी।
RBIH इन डेटा सेट्स का उपयोग करके AI आधारित धोखाधड़ी जोखिम मूल्यांकन मॉडल को और उन्नत करेगा, जिसमें MuleHunter.ai™ भी शामिल है।
गृहमंत्री अमित शाह ने बोले – साइबर सुरक्षा पर चला रहा है निरंतर काम
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने X पर पोस्ट कर कहा कि मोदी सरकार साइबर सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि म्यूल खाते साइबर अपराधों में बड़ी बाधा हैं और इस नई पहल से AI की मदद से ऐसे खातों की पहचान और रोकथाम और तेज होगी।
किनके हस्ताक्षर और कौन रहे मौजूद
इस MoU पर I4C की IG (प्रशासन) श्रीमती रूपा एम और RBIH के CEO श्री साहिल किन्नी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर RBI के डिप्टी गवर्नर श्री रोहित जैन, MHA के विशेष सचिव (IS) श्री आनंद स्वरूप, संयुक्त सचिव (CIS) श्री राकेश राठी, I4C के CEO श्री राजेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
साइबर सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
I4C लगातार NCRP, Suspect Registry और अन्य इंटेलिजेंस सिस्टम के जरिए देश में साइबर अपराध रोकने पर काम कर रहा है। वहीं RBIH डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सिस्टम में तकनीकी नवाचार और AI आधारित सुरक्षा उपायों को बढ़ावा दे रहा है।
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