
नई दिल्ली: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। यह बड़ा निर्णय बड़े पैमाने पर “गेस पेपर” लीक होने के आरोपों और विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों से मिले महत्वपूर्ण इनपुट्स के बाद लिया गया है। केंद्र सरकार ने इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की शुचिता, पारदर्शिता और छात्रों के विश्वास को बनाए रखने के लिए अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की शुरुआती जांच में सामने आया कि परीक्षा से काफी समय पहले एक प्रश्न पत्र सर्कुलेट हो रहा था, जिसके करीब 120 से अधिक सवाल मुख्य परीक्षा के केमिस्ट्री और बायोलॉजी सेक्शन से पूरी तरह मेल खाते थे।
बच्चों को मिली बड़ी राहत
NTA ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि NEET-UG 2026 की परीक्षा अब नए सिरे से आयोजित की जाएगी। छात्रों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अभ्यर्थी को दोबारा पंजीकरण मतलब Registration कराने की जरूरत नहीं होगी। पुराने रजिस्ट्रेशन डेटा और छात्रों द्वारा पहले से चुने गए परीक्षा केंद्रों को ही आगामी परीक्षा के लिए मान्य माना जाएगा। इसके अलावा, NTA ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए घोषणा की है कि छात्रों द्वारा पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी और दोबारा होने वाली इस परीक्षा का पूरा खर्च एजेंसी अपने आंतरिक संसाधनों से वहन करेगी। नई परीक्षा तिथियों और एडमिट कार्ड जारी करने के शेड्यूल की घोषणा जल्द ही NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर की जाएगी।
पेपक लीक के तार कई राज्यों से जुड़े
इस पेपर लीक विवाद के तार देश के कई राज्यों से जुड़े होने की आशंका है। राजस्थान SOG की जांच में अब तक जयपुर, झुंझुनूं, सीकर और देहरादून से लगभग 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए प्रश्न पत्र साझा किए गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, यह कथित ‘गेस पेपर’ 30,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक में बेचा गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि केमिस्ट्री का पूरा पेपर ही लीक हो गया था। अब CBI इस संगठित गिरोह के पीछे सक्रिय मास्टरमाइंड और इसके अखिल भारतीय नेटवर्क का पता लगाएगी।
राजनीतिक घमासान और विरोध प्रदर्शन
NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने शास्त्री भवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “युवाओं के भविष्य के खिलाफ एक सुनियोजित अपराध” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में पेपर माफिया बेखौफ हैं और इससे लाखों मेहनती छात्रों के सपने टूटे हैं। फिलहाल, 22.79 लाख से अधिक पंजीकृत छात्र मानसिक तनाव के बीच नई परीक्षा की तारीखों का इंतजार कर रहे हैं।
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