
जावरा/आशीष शर्मा: जावरानगर में एक बार फिर मानवता और समाज सेवा का अपूर्व उदाहरण प्रस्तुत किया गया। संजीवनी फाउंडेशन की पहल पर यह शहर का चौथा देहदान संपन्न हुआ। शहर में अब तक तीन लोग पूर्व में अपनी देह मेडिकल कॉलेज को दान कर चुके थे, जिससे चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अनुसंधान और अध्ययन के लिए महत्त्वपूर्ण अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
यह देहदान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक अमूल्य योगदान माना जाता है, क्योंकि यह छात्रों को मानव शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को गहराई से समझने में मदद करता है। नगर निवासी सुमन देवी धारीवाल और उनके पति सुभाष चंद्र धाड़ीवाल ने काफी समय पहले ही संजीवनी फाउंडेशन को देहदान के लिए फॉर्म भरकर अपनी लिखित सहमति दे दी थी। इस दूरदर्शितापूर्ण निर्णय के माध्यम से उन्होंने समाज को एक प्रेरणादायक संदेश दिया था कि मरणोपरांत भी व्यक्ति समाज के लिए उपयोगी हो सकता है।
गौतलब है की बुधवार की रात्रि में सुमन देवी धारीवाल का निधन होने के बाद उनके परिजनों ने तुरंत संजीवनी फाउंडेशन और स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दी। गुरुवार की सुबह प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर देहदान करने वाली महिला को राष्ट्रीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया।
यह सम्मान उनके इस महान कार्य और त्याग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए था। इसके बाद परिजनों ने एक संक्षिप्त शव यात्रा निकाली और कुछ दूर तक कंधा देने के उपरांत, मेडिकल कॉलेज की टीम को सुमन देवी की देह सम्मानपूर्वक सौंप दी।
इस प्रकार, सुमन देवी धारीवाल ने मरणोपरांत भी समाज सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सकों को सीखने और मानव जीवन को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। परिवार जनों ने मेडिकल कॉलेज को डे देने से पहले शहर के लाइंस क्लब में दोनों नेत्रों को दान भी करवाया है जिससे किसी जरूरतमंद को उनके नेत्रों से रोशनी मिल सके।
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