भोज विवि के रजिस्ट्रार सुनील मदेरिया पर आरोपों की बौछार, क्या ‘उज्जैन कनेक्शन’ बना है जांच में रोड़ा?

मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और शुचिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजा भोज मुक्त विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सुनील मदेरिया पर लगे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के संगीन आरोप आज दिनांक तक न तो गलत साबित हुए हैं और न ही उन पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिली है। आखिर क्या कारण है कि प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति यहाँ आकर घुटने टेक देती है?

सुनील मदेरिया के कार्यकाल के दौरान कई प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सार्वजनिक हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि पर्याप्त शिकायतों के बावजूद सरकार और विभाग ने अब तक कोई निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की है। गलियारों में चर्चा है कि मदेरिया का ‘उज्जैन कनेक्शन’ उनकी सबसे बड़ी ढाल बना हुआ है। वे स्वयं को उज्जैन से जुड़ा हुआ बताते हैं, जो प्रदेश के मुखिया का गृह क्षेत्र भी है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—क्या उज्जैन से जुड़ा होना किसी अधिकारी को जांच के घेरे से बाहर कर देता है?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करते हैं। लेकिन भोज विश्वविद्यालय के इस प्रकरण ने सरकार की कथनी और करनी के अंतर को उजागर कर दिया है।

क्या मोहन यादव जी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम सुनील मदेरिया जैसे प्रभावशाली अधिकारियों के आगे फेल हो गई है?

क्या मुख्यमंत्री जी अपने ही क्षेत्र का नाम लेकर रसूख दिखाने वाले अधिकारियों पर लगाम नहीं कसेंगे?

प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे मुख्य सचिव की कार्यप्रणाली और उनकी ईमानदारी पर भी अब उंगलियां उठने लगी हैं। यदि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी फाइलें दबी हुई हैं, तो क्या यह माना जाए कि मुख्य सचिव की सख्ती भी इस ‘सिस्टम’ के आगे बेअसर है? जनता यह देख रही है कि क्या नियम-कायदे सिर्फ छोटे कर्मचारियों के लिए हैं या बड़े पदों पर बैठे ‘माननीयों’ की भी जवाबदेही तय होगी।

ब्रैंडवाणी समाचार प्रशासन से सीधे शब्दों में पूछता है कि आखिर जांच से परहेज क्यों? यदि आरोप गलत हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खारिज किया जाए, और यदि उनमें सत्यता है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव इस मामले में कोई कड़ा कदम उठाते हैं या फिर ‘उज्जैन कनेक्शन’ का हवाला देकर भ्रष्टाचार के इन आरोपों को ठंडे बस्ते में ही रहने दिया जाएगा।

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gaurav singh rajput

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