
भोपाल: मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतें आम आदमी के लिए जी का जंजाल बन गई हैं। राज्य सरकार द्वारा वसूले जा रहे भारी-भरकम टैक्स ने एमपी को देश के सबसे महंगे राज्यों की सूची में खड़ा कर दिया है।
लूट का गणित:
MP vs UP: उत्तर प्रदेश में पेट्रोल ₹95 के आसपास है, जबकि एमपी में यह ₹115 के पार है। सीधा ₹20 प्रति लीटर का अंतर!
टैक्स का जाल: सरकार सिर्फ प्रतिशत (29% VAT) ही नहीं, बल्कि प्रति लीटर अतिरिक्त टैक्स और सड़क सेस भी वसूल रही है।
जनता पर बोझ: डीजल महंगा होने से माल ढुलाई और खेती की लागत बढ़ गई है, जिससे महंगाई हर घर की रसोई तक पहुँच चुकी है।
पड़ोसी राज्यों (गुजरात, यूपी) में तेल सस्ता होने के बावजूद एमपी सरकार टैक्स घटाने को तैयार नहीं है। प्रशासन इसे ‘राजस्व’ का नाम देता है, लेकिन जनता इसे ‘आर्थिक शोषण’ मान रही है।
क्या विकास का पूरा बोझ सिर्फ तेल भरवाने वाली जनता ही उठाएगी? आखिर कब थमेगी यह सरकारी वसूली?
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