
उमरिया/राकेश दर्दवंशीं की रिपोर्ट: जिला शिक्षा केंद्र उमरिया में सहायक परियोजना समन्वयक (मोबिलाइजेशन) एवं वित्त शाखा की व्यवस्थागत पदस्थापना को लेकर हाल ही में प्रकाशित खबरों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ तथाकथित कर्मचारियों द्वारा कार्यालय की आंतरिक व्यवस्थाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत कर मीडिया को भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है।
जानकारी के मुताबिक संबंधित पदों पर किसी प्रकार की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है, बल्कि कार्य की आवश्यकता को देखते हुए केवल व्यवस्थागत रूप से अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया गया कि सहायक परियोजना समन्वयक (मोबिलाइजेशन) का पद पिछले लगभग दो वर्षों से रिक्त था। इस दौरान अन्य अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन उनके पास दिव्यांग छात्रावास की भी जिम्मेदारी होने से शाखा का कार्य प्रभावित हो रहा था। ऐसे में अनुभवी अधिकारी को व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी सौंपना आवश्यक माना गया।
संबंधित प्रस्ताव पूर्व में जनपद शिक्षा केंद्र करकेली में पदस्थ अधिकारी की सहमति और अनुभव के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। कलेक्टर द्वारा सत्र समाप्ति के बाद आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए थे। नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होने पर पुनः प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया और अनुमोदन प्राप्त होने के बाद व्यवस्थागत आदेश जारी किए गए।
वहीं सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) का अतिरिक्त प्रभार भी कार्यालय में पदस्थ अधिकारी को संतोष कुमार गौतम के आकस्मिक निधन के बाद दिया गया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में भी इसी प्रकार व्यवस्था के तहत अतिरिक्त प्रभार दिया जाता रहा है और पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति एवं अनुमोदन के बाद स्थापना शाखा द्वारा संपादित की गई। मामले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुछ समाचारों में लेखापाल पर लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। विभाग का कहना है कि संबंधित व्यवस्थागत आदेशों में लेखा शाखा की कोई भूमिका नहीं रही। इसी प्रकार जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली खरीदी की प्रक्रिया एमआईएस शाखा के अधीन संचालित होती है, जिसका संचालन जिला प्रोग्रामर के अधीन किया जाता है।
छात्रावास के लेखापाल प्रभार को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यवाही राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के पत्र क्रमांक 2865 दिनांक 10 मई 2018 के निर्देशों के अनुरूप की गई है। विभागीय सूत्रों का आरोप है कि कुछ कर्मचारी निजी हितों के चलते कार्यालय की आंतरिक जानकारी सार्वजनिक कर विभागीय कार्यप्रणाली को प्रभावित करने और छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं मामले को लेकर विभागीय स्तर पर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की बात कही जा रही है।
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