
डबरा/भरत रावत की रिपोर्ट: शहर के संत कंवरराम विद्यालय में रविवार को सिंधु रॉयल्स डबरा द्वारा “तोलानी सेवा संकल्प” के तहत थैलेसीमिया माइनर जांच एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य समाज में थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना, युवाओं को विवाह पूर्व जांच के लिए प्रेरित करना तथा आने वाली पीढ़ियों को इस आनुवंशिक रक्त विकार से बचाने के प्रति जागरूक करना था। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और 220 से अधिक लोगों की थैलेसीमिया माइनर जांच की गई।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी नरेश कुमार तोलानी ने थैलेसीमिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया कोई संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि एक वंशानुगत (जेनेटिक) रक्त विकार है, जो माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित होता है। यदि दो थैलेसीमिया माइनर व्यक्ति आपस में विवाह करते हैं, तो उनके बच्चों में थैलेसीमिया मेजर होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों को जीवनभर नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। लगातार रक्त चढ़ाने के कारण शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके लिए अलग से महंगा उपचार करना पड़ता है। इससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार का भारी दबाव पड़ता है।
नरेश तोलानी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि विवाह से पहले थैलेसीमिया जांच अवश्य करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि शादी के बाद दोनों जीवनसाथी थैलेसीमिया माइनर पाए जाते हैं, तो गर्भावस्था के शुरुआती चरण में आवश्यक चिकित्सकीय जांच के माध्यम से बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाया जा सकता है और उचित चिकित्सकीय सलाह ली जा सकती है। शिविर में मौजूद चिकित्सकों और समाजसेवियों ने भी लोगों को थैलेसीमिया के प्रति जागरूक रहने, समय-समय पर जांच कराने और इस विषय पर सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता और समय पर जांच ही थैलेसीमिया जैसी गंभीर समस्या की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में डॉ. कमल कटारिया (अध्यक्ष), घनश्याम हबलानी (कार्यक्रम संयोजक), डॉ. संजय अमुलानी, दिलीप आहूजा, सचिव राजेश रोहिरा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, चिकित्सक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य के उद्देश्य से आयोजित यह शिविर थैलेसीमिया के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा युवाओं को जिम्मेदार स्वास्थ्य निर्णय लेने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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