
सीहोर | नफीस खान
सीहोर जिले की भेरुन्दा (नसरुल्लागंज) जनपद पंचायत के अंतर्गत विभिन्न नदी घाटों पर प्रस्तावित नाव संचालन टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया शुरू करने से पहले नियमानुसार व्यापक सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई और सीधे बैठक आयोजित कर दी गई।
स्थानीय लोगों का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया में सभी इच्छुक पक्षों को समान अवसर नहीं मिल पाया। इसी बीच यह चर्चा भी है कि बाबरी घाट का ठेका पूर्व में कार्यरत ठेकेदार को पुनः दिए जाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल
विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती तो अधिक संख्या में इच्छुक आवेदक भाग ले सकते थे। उनका आरोप है कि पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुरक्षा सुविधाओं को लेकर भी चिंता
स्थानीय नागरिकों ने नाव संचालन व्यवस्था में सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई घाटों पर यात्रियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। आरोप है कि नावों में सुरक्षा उपकरणों और यात्रियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की कमी देखी जा रही है।
इसके अलावा घाटों पर प्रतीक्षालय, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायतें भी सामने आई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि नाव संचालन का ठेका दिया जाता है तो सुरक्षा मानकों और यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जांच की मांग
मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों ने पूरी टेंडर प्रक्रिया की जांच कराने और सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया से ही जनता का विश्वास कायम रह सकता है।
फिलहाल इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है। प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।








