
पासपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार के एक बयान के बाद नागरिकता संबंधी बहस तेज हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है और इसे अपने आप में भारतीय नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के सामने आने के बाद विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए सबसे मान्य दस्तावेज कौन-सा माना जाएगा।
सरकार का तर्क है कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर होती है, लेकिन कानूनी रूप से पासपोर्ट का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा की अनुमति देना है। किसी व्यक्ति की नागरिकता से जुड़े विवाद या कानूनी जांच की स्थिति में अन्य दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का एकमात्र और अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि आम नागरिक वर्षों से पासपोर्ट को सबसे विश्वसनीय पहचान और नागरिकता दस्तावेज मानते आए हैं। ऐसे में सरकार के इस स्पष्टीकरण से लोगों के मन में भ्रम पैदा हो सकता है। विपक्ष ने पूछा है कि यदि पासपोर्ट पर्याप्त नहीं है, तो नागरिकता साबित करने के लिए सरकार किन दस्तावेजों को सर्वोच्च मान्यता देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय नागरिकता का निर्धारण विभिन्न कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जाता है। जन्म प्रमाणपत्र, नागरिकता प्रमाणपत्र (जहां लागू हो), सरकारी रिकॉर्ड, पारिवारिक दस्तावेज और अन्य वैधानिक साक्ष्य नागरिकता निर्धारण में भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और सरकार से इस संबंध में और अधिक स्पष्टता की मांग की जा रही है।
- passport-is-travel-document-not-proof-of-citizenship-government-congress-row







