
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का स्वरूप भी पहले से कहीं अधिक खतरनाक होता जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग अब AI आधारित टूल्स की मदद से 100 से अधिक भाषाओं में लोगों को निशाना बना रहे हैं। अत्याधुनिक अनुवाद तकनीक, नकली आवाज (Voice Cloning), डीपफेक वीडियो और स्वचालित चैट सिस्टम के जरिए ठग दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों का विश्वास जीतकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं।
रिपोर्टों में सबसे चौंकाने वाला खुलासा म्यांमार में संचालित कथित स्कैम सेंटरों को लेकर हुआ है। इन केंद्रों में काम करने वाले लोगों को कथित तौर पर प्रतिदिन बड़ी रकम की ऑनलाइन ठगी का लक्ष्य दिया जाता है। दावा किया गया है कि यदि निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं होता, तो उन्हें शारीरिक प्रताड़ना, बिजली के झटके और अन्य अमानवीय यातनाओं का सामना करना पड़ता है। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी ऐसे स्कैम नेटवर्क में मानव तस्करी और जबरन श्रम की आशंका जताई है।
कुछ रिपोर्टों में महिलाओं और युवतियों के साथ गंभीर यौन हिंसा और दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में संभव नहीं हो सकी है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लंबे समय से दक्षिण-पूर्व एशिया में संचालित साइबर स्कैम नेटवर्क और मानव तस्करी को लेकर चिंता व्यक्त करती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन अपराधों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।
AI तकनीक ने साइबर अपराधियों को पहले से अधिक सक्षम बना दिया है। अब ठग किसी व्यक्ति की भाषा, बोलचाल और स्थानीय संस्कृति के अनुरूप संदेश तैयार कर सकते हैं। वे नकली ग्राहक सेवा अधिकारी, बैंक कर्मचारी, निवेश सलाहकार, सरकारी अधिकारी या परिचित व्यक्ति बनकर लोगों को धोखा देते हैं। कई मामलों में AI की मदद से वास्तविक जैसी आवाज तैयार कर पीड़ितों को भ्रमित किया जाता है, जिससे ठगी का पता लगाना और मुश्किल हो जाता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि AI जितना शक्तिशाली उपकरण है, उसका दुरुपयोग भी उतना ही गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए लोगों को किसी भी अनजान कॉल, संदेश, वीडियो कॉल या निवेश प्रस्ताव पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। बैंकिंग जानकारी, OTP, पासवर्ड या व्यक्तिगत दस्तावेज किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करने से बचना चाहिए। यदि किसी कॉल या संदेश पर संदेह हो, तो संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से उसकी पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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