
शिवपुरी: शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों और मध्य प्रदेश के लोगों के लिए स्वतंत्रता दिवस पर बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। टाइगर रिजर्व में पुनर्वासित की गई मादा बाघिन MT-4 पहली बार अपने लगभग 3 महीने के शावक के साथ दिखाई दी है। माधव राष्ट्रीय उद्यान में लगाए गए कैमरा ट्रैप और गश्ती टीम द्वारा ली गई शुरुआती तस्वीरों में इस नन्हें शावक की स्पष्ट झलक दिखाई दी है। हालांकि, रिजर्व प्रबंधन अभी इस बात की पूरी तरह से पड़ताल और पुष्टि करने में जुटा हुआ है कि बाघिन MT-4 ने केवल एक ही शावक को जन्म दिया है या उसके साथ अन्य शावक भी मौजूद हैं।
माधव टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़कर हुआ 9
इससे पहले बाघिन MT-3 द्वारा 2 शावकों को जन्म देने के बाद माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 8 हो गई थी। अब बाघिन MT-4 के इस नए शावक के सामने आने के बाद रिजर्व में बाघों की कुल संख्या का आंकड़ा कम से कम 9 तक पहुंच चुका है। डीएफओ हरिओम ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि नवजात शावक और बाघिन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रिजर्व प्रबंधन ने विशेष ट्रैकिंग और निगरानी व्यवस्था को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में और तस्वीरें सामने आने पर शावकों की वास्तविक संख्या पूरी तरह साफ हो सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर जताई खुशी
क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने माधव टाइगर रिजर्व में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यह देखकर मन प्रसन्न है कि माधव टाइगर रिजर्व में 10 मार्च 2025 को लाई गई MT-4 बाघिन अब अपने नन्हे शावक के साथ देखी गई है। मध्य प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव विरासत और हमारे संरक्षण के प्रयासों की यह खूबसूरत सफलता हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।”
मार्च 2025 में मिला था टाइगर रिजर्व का दर्जा
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2025 में माधव नेशनल पार्क को देश के 58वें और मध्य प्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। कुल 1,751 वर्ग किलोमीटर में फैले इस टाइगर रिजर्व को 375 वर्ग किलोमीटर कोर जोन और 1,276 वर्ग किलोमीटर बफर जोन में विभाजित किया गया है। टाइगर रिजर्व का औपचारिक दर्जा मिलने के बाद से ही यहाँ बाघों के कुनबे में लगातार हो रही यह वृद्धि न केवल क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत कर रही है, बल्कि ईको-टूरिज्म के लिहाज से भी एक बड़ा और सकारात्मक संकेत है।
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