सुबह 8 बजे खुलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों पर लटके मिले ताले, अधिकारियों की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल

दतिया/सेवढ़ा/ संतोष चंसौलिया: महिला एवं बाल विकास विभाग की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। परियोजना सेवढ़ा के अंतर्गत संचालित आधा दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र निर्धारित समय के बाद भी बंद मिले। शासन के निर्देशानुसार सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुबह 8 बजे से होना चाहिए, लेकिन निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर ताले लटके मिले।

न तो बच्चे मौजूद थे और न ही केंद्र का स्टाफ

जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-2 वार्ड क्रमांक-7 सेवढ़ा, केंद्र क्रमांक-2 सिरसा, केंद्र क्रमांक-1 देभई, मोहनपुरा तथा केंद्र क्रमांक-1 बड़ोखरी सहित आधा दर्जन से अधिक केंद्र निर्धारित समय के बाद भी बंद पाए गए। कई स्थानों पर परिसर पूरी तरह सूने थे और न तो बच्चे मौजूद थे और न ही केंद्र का स्टाफ।

शासन की योजनाओं का लाभ

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, पूरक पोषण आहार, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में समय पर केंद्र नहीं खुलने से हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति नई नहीं है। कई केंद्रों पर अक्सर निर्धारित समय के बाद भी ताले लगे रहते हैं, जिससे बच्चों की प्री-स्कूल गतिविधियां और पोषण आहार वितरण प्रभावित होता है। ग्रामीणों ने विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास

इस संबंध में परियोजना अधिकारी राजेंद्र गुर्जर से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई

अब सवाल यह है कि क्या महिला एवं बाल विकास विभाग इस मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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दतिया में निर्धारित समय के बाद भी बंद मिले दो आंगनबाड़ी केंद्र, हितग्राही लौटे निराश

दतिया/ संतोष चंसौलिया: सेवढ़ा क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला एवं बाल विकास परियोजना सेवढ़ा के अंतर्गत संचालित ग्राम ग्यारा के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-2 और वार्ड क्रमांक-7 के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-2 निर्धारित संचालन समय के बाद भी बंद मिले। दोनों केंद्रों पर ताले लटके होने से हितग्राहियों को बिना सेवाएं लिए वापस लौटना पड़ा।

शासन की योजनाओं का लाभ

आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, छह वर्ष तक के बच्चों और किशोरी बालिकाओं को पूरक पोषण आहार, स्वास्थ्य सेवाएं और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन केंद्र बंद रहने से इन सभी सेवाओं पर असर पड़ा और पात्र हितग्राही शासन की योजनाओं का लाभ नहीं ले सके।

कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र समय पर नहीं खुलने से बच्चों की प्री-स्कूल गतिविधियां प्रभावित होती हैं। वहीं पोषण आहार वितरण और अन्य आवश्यक सेवाएं भी बाधित होती हैं। ग्रामीणों ने नियमित निरीक्षण और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

जांच में लापरवाही

मामले में जब महिला एवं बाल विकास परियोजना सेवढ़ा के परियोजना अधिकारी राजेंद्र गुर्जर से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि यदि केंद्र निर्धारित समय पर बंद पाए गए हैं तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं कि आखिर आंगनबाड़ी केंद्र निर्धारित समय पर क्यों नहीं खुले और इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

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Manisha Gupta

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