
शिवपुरी/कुलदीप शर्मा की रिपोर्ट: करैरा तहसील में किसानों के लिए जारी होने वाले खाद वितरण टोकनों में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। तहसीलदार की शिकायत पर करैरा थाना पुलिस ने आउटसोर्स ऑपरेटर धर्मवीर लोधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं आरोपी कर्मचारी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वरिष्ठ अधिकारी अपनी गलती छिपाने के लिए उन्हें झूठा फंसा रहे हैं।
एफआईआर के अनुसार, तहसील कार्यालय करैरा में ई-विकास प्रणाली के माध्यम से किसानों को खाद वितरण के लिए टोकन जारी किए जाते हैं। इस कार्य के लिए आउटसोर्स ऑपरेटर के रूप में धर्मवीर लोधी की नियुक्ति की गई थी। तहसीलदार द्वारा थाने में दिए गए शिकायत पत्र में बताया गया कि 14 जुलाई 2026 को टोकनों की जांच के दौरान चार किसानों के नाम से जारी टोकन संदिग्ध पाए गए।
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जांच में संबंधित हल्का पटवारियों ने बताया कि जिन व्यक्तियों के नाम से टोकन जारी किए गए, वे संबंधित गांवों के निवासी नहीं हैं और उनके नाम पर वहां कोई भूमि भी दर्ज नहीं है। शिकायत के अनुसार सेतु लोधी (डुमगना), महेश (सिलानगर), यशवंत लोधी (अमोलपठा) और छोटू झां (मछावली) के नाम से जारी टोकन संदिग्ध पाए गए।
तहसीलदार का आरोप है कि ऑपरेटर को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि संबंधित हल्का पटवारी के सत्यापन के बाद ही टोकनों का सत्यापन किया जाए। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि धर्मवीर लोधी से इस संबंध में पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने कथित रूप से अपनी गलती स्वीकार की। इसके बाद कार्रवाई के लिए प्रकरण कार्यालय कानूनगो को सौंपा गया। आरोप है कि उसी दिन शाम को धर्मवीर लोधी कथन की मार्क की गई प्रति लेकर कार्यालय से चले गए, जिसके बाद उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। करैरा थाना पुलिस ने तहसीलदार की शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
आरोपी कर्मचारी का पक्ष
आउटसोर्स ऑपरेटर धर्मवीर लोधी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है और वरिष्ठ अधिकारी अपनी कथित त्रुटियों को छिपाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बना रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
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