
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान अभद्र व्यवहार और हंगामा करने के आरोप में गिरफ्तार दोनों छात्रों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में आरोपियों के कथित आचरण को निंदनीय बताया, लेकिन यह भी कहा कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।
कागजात फेंकने और सुरक्षा कर्मी से हाथापाई करने के आरोप
यह मामला 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें दो कानून के छात्रों पर अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डालने, कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग करने, कागजात फेंकने और सुरक्षा कर्मी से हाथापाई करने के आरोप लगे थे। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों छात्रों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
आरोपों की सत्यता का परीक्षण
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पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि आरोप गंभीर अवश्य हैं, लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था में “जमानत नियम है और जेल अपवाद” का सिद्धांत लागू होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपों की सत्यता का परीक्षण किया जाएगा और फिलहाल जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है।
निर्धारित शर्तों के साथ जमानत
अदालत ने दोनों आरोपियों को निर्धारित शर्तों के साथ जमानत प्रदान की है। साथ ही यह भी कहा कि उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा और न्यायिक प्रक्रिया को किसी भी प्रकार से प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा
यह मामला सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, न्यायालय की कार्यवाही में अनुशासन और अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले की जांच और ट्रायल की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
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