
सागर: जिला कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने स्वास्थ्य विभाग की साप्ताहिक समीक्षा बैठक लेकर जिले में संचालित स्वास्थ्य गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी गर्भवती महिला की नई एएनसी यानी प्रसव पूर्व जांच किसी भी स्थिति में नहीं छूटनी चाहिए और निर्धारित मासिक लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जाए।
बैठक में कलेक्टर ने सेक्टरवार अपेक्षित गर्भवती महिलाओं के आंकड़ों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जो सेक्टर निर्धारित अनुपातिक लक्ष्य से कम प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी कर जवाब लिया जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान में कोई भी सेक्टर जिले के औसत से नीचे नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही गंभीर एनीमिया के मामलों की पहचान और उनके उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन यानी पीआईएच के मामलों की भी गंभीरता से समीक्षा करने और चिन्हित महिलाओं का समय पर उपचार एवं प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जोखिम वाले मामलों की पहचान के बाद उनके प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
बच्चों के टीकाकरण पर भी विशेष फोकस
कलेक्टर ने बच्चों के टीकाकरण की ड्यू और ओवरड्यू सूची को शून्य अथवा न्यूनतम स्तर पर लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को निर्धारित समय पर टीके लगना उनकी सुरक्षा और स्वस्थ विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर यानी एचबीएनसी गतिविधियों को भी प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए।
कमजोर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की होगी पहचान
कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को नियमित साप्ताहिक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। बैठक में तय मानकों के आधार पर सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली 25 एएनएम और 5 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स को चिन्हित किया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों से व्यक्तिगत चर्चा कर उनके कमजोर प्रदर्शन के कारणों की जानकारी लेने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की बर्थ मैपिंग पर जोर
बैठक में कलेक्टर ने बर्थ मैपिंग के तहत टैगिंग का कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हाई रिस्क गर्भवती महिला की पहचान और टैगिंग आवश्यक रूप से की जाए, ताकि जरूरत के अनुसार समय पर उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रकरणों की पहचान और उनके प्रबंधन के बीच किसी भी प्रकार का अंतर नहीं रहना चाहिए। चिन्हित प्रत्येक हाई रिस्क प्रकरण में समय पर सही हस्तक्षेप सुनिश्चित कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को कम किया जाए।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न गतिविधियों की गंभीरता से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया, डॉ. अचला जैन और डॉ. आशीष जैन सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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