लूट की मंडी बना ‘माध्यम और जनसंपर्क का ‘कमीशन कांड’: इवेंट्स के नाम पर करोड़ों का वारा-न्यारा, आखिर किसका है संरक्षण?

मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग: 'पब्लिक रिलेशन' नहीं, अब 'पर्सनल कलेक्शन' का नया अड्डा!

मध्य प्रदेश की प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा आम है—”दोगे जितना ज्यादा, मिलेगा उतना बड़ा।” सरकारें बदलती हैं, चेहरे बदलते हैं, लेकिन जनसंपर्क विभाग और माध्यमके भीतर बैठा भ्रष्टाचार का वह पुराना सिंडिकेट नहीं बदलता। जो विभाग सरकार की छवि चमकाने के लिए बना था, आज वही अपनी कमीशनखोरी की कालिख से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को धुंधला कर रहा है। आज हम उस गहरी साजिश की परतें खोलेंगे, जहाँ विज्ञापन और टेंडर मेरिटपर नहीं, बल्कि सेटिंगपर बांटे जा रहे हैं।

मुख्य भाग

1. विज्ञापन की नीलामीऔर छोटे अखबारों का गला घोंटना: जनसंपर्क विभाग के भीतर एक अघोषित रेट कार्डचल रहा है। यहाँ विज्ञापन उन अखबारों या पोर्टल्स को नहीं मिलते जो जनहित की बात करते हैं, बल्कि उन्हें मिलते हैं जो अधिकारियों की जेबें गर्म करना जानते हैं। ईमानदार पत्रकार और छोटे मीडिया संस्थान आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि वे इस कमीशन के खेलमें फिट नहीं बैठते। क्या विभाग अब केवल पसंदीदाघरानों की एटीएम मशीन बनकर रह गया है?

2. ‘माध्यमके इवेंट्स: भ्रष्टाचार का मेगा शो: सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सरकारी आयोजनों का जिम्मा सँभालने वाला माध्यमअब भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है। करोड़ों के इवेंट्स के टेंडर चुनिंदा कंपनियों को रेवड़ियों की तरह बांटे जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि टेंडर जारी होने से पहले ही फिक्सिंगहो जाती है। यह जनता की गाढ़ी कमाई का सीधा अपमान है। क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन को इस काली कमाईकी दुर्गंध नहीं आ रही?

3. अधिकारियों की मिलीभगत या मौन सहमति? सवाल यह उठता है कि क्या इन विभागों में पोस्टिंग केवल उन अधिकारियों की होती है जो कलेक्शनकी कला में माहिर हैं? या फिर शीर्ष स्तर पर बैठे जिम्मेदार लोगों ने इस लूट को अपनी मूक सहमति दे दी है? जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंसका दावा करने वाली सरकार में परसेंटेज कल्चरका फलना-फूलना कई अनसुलझे सवाल छोड़ता है।

हमारा संस्थान न तो सरकार से विज्ञापन की भीख माँगता है और न ही इस भ्रष्ट तंत्र के आगे झुकने को तैयार है। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—सच लिखना और सत्ता के अहंकार को आईना दिखाना। जनसंपर्क और माध्यम विभाग के इन सफेदपोश लुटेरोंके खिलाफ हमारी कलम का प्रहार जारी रहेगा। मध्य प्रदेश की जनता को लूटने वालों के चेहरे बेनकाब करना हमारी जिम्मेदारी है और हम इससे पीछे नहीं हटेंगे।

अब देखना यह है कि क्या वल्लभ भवन की ऊँची दीवारों के पीछे बैठे हुक्मरान इस सिंडिकेट को तोड़ेंगे, या फिर कमीशन का यह खेलयूँ ही बदस्तूर जारी रहेगा?

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

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