
अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने ईरान को वैश्विक आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़ बताते हुए उस पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ईरान का वर्तमान शासन “सनकी और क्रूर” नीतियों पर चल रहा है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। अमेरिकी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा को खतरा होगा।
उपराष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव को जारी रखा जाएगा। उनका कहना था कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को सैन्य दिशा में आगे बढ़ाता है, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सख्त कदम उठाने होंगे। अमेरिका लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान क्षेत्र में सक्रिय कई सशस्त्र समूहों को समर्थन देता है, जिससे संघर्ष और हिंसा बढ़ती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है। इजराइल-ईरान टकराव, गाजा संकट और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। अमेरिका की यह सख्त चेतावनी संकेत देती है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है और आवश्यक होने पर सैन्य विकल्प भी खुला रख सकता है।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान का उद्देश्य सहयोगी देशों को एकजुट करना और ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना है। अमेरिका चाहता है कि परमाणु प्रसार रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त रुख अपनाया जाए। आने वाले समय में ईरान-परमाणु मुद्दा फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिसका असर तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।









