
मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में पदस्थ एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इन दिनों अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अधिक कथित वीकेंड पार्टियों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार यह अधिकारी मालवा के एक जिले में कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं और पिछले कुछ वर्षों से इसी क्षेत्र में पदस्थ हैं।
सप्ताहांत में होने वाले आयोजनों की चर्चा
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि अधिकारी के सरकारी आवास पर अक्सर सप्ताहांत में बड़े स्तर पर सामाजिक आयोजन होते हैं। बताया जाता है कि इन कार्यक्रमों में प्रशासनिक सेवा से जुड़े कुछ अधिकारी, अन्य विभागों के अधिकारी और कुछ कारोबारी भी शामिल होते हैं।
आयोजनों के स्वरूप पर उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक इन पार्टियों में खान-पान और मनोरंजन के साथ देर रात तक कार्यक्रम चलते हैं। हालांकि इन आयोजनों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ लोग इन आयोजनों के स्वरूप और उसमें शामिल लोगों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
प्रशासनिक उपलब्धता पर चिंता
प्रशासनिक हलकों में चिंता इस बात को लेकर भी जताई जा रही है कि यदि किसी आपात प्रशासनिक स्थिति में अधिकारी की आवश्यकता हो तो उनकी उपलब्धता सुनिश्चित रहनी चाहिए। इसी वजह से इन आयोजनों को लेकर अब अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं और सवाल उठने लगे हैं।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में किसी भी स्तर पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस विषय को लेकर चर्चा जारी है और आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में पदस्थ एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इन दिनों अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अधिक कथित वीकेंड पार्टियों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार यह अधिकारी मालवा के एक जिले में कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं और पिछले कुछ वर्षों से इसी क्षेत्र में पदस्थ हैं।
सप्ताहांत में होने वाले आयोजनों की चर्चा
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि अधिकारी के सरकारी आवास पर अक्सर सप्ताहांत में बड़े स्तर पर सामाजिक आयोजन होते हैं। बताया जाता है कि इन कार्यक्रमों में प्रशासनिक सेवा से जुड़े कुछ अधिकारी, अन्य विभागों के अधिकारी और कुछ कारोबारी भी शामिल होते हैं।
आयोजनों के स्वरूप पर उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक इन पार्टियों में खान-पान और मनोरंजन के साथ देर रात तक कार्यक्रम चलते हैं। हालांकि इन आयोजनों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ लोग इन आयोजनों के स्वरूप और उसमें शामिल लोगों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
प्रशासनिक उपलब्धता पर चिंता
प्रशासनिक हलकों में चिंता इस बात को लेकर भी जताई जा रही है कि यदि किसी आपात प्रशासनिक स्थिति में अधिकारी की आवश्यकता हो तो उनकी उपलब्धता सुनिश्चित रहनी चाहिए। इसी वजह से इन आयोजनों को लेकर अब अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं और सवाल उठने लगे हैं।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में किसी भी स्तर पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस विषय को लेकर चर्चा जारी है और आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।







