
मध्य-पूर्व में चल रहा तनाव अब और तेज होता नजर आ रहा है। अमेरिका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि ईरान के सैन्य ढांचे पर बड़ा हमला किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी और इजराइली सैन्य रणनीति का मुख्य लक्ष्य ईरान के मिसाइल लॉन्चर, हथियार निर्माण फैक्ट्रियों और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की जा सकती है। इस संभावित हमले को क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान बताया जा रहा है।
इसी बीच ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित मेहराबाद एयरपोर्ट पर भी बड़े हमले की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, एयरपोर्ट के आसपास जोरदार धमाके सुने गए और कई जगहों पर आग लगने की तस्वीरें सामने आईं। बताया जा रहा है कि हमले के बाद एयरपोर्ट परिसर में धुआं और आग दिखाई दी, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इजराइल लगातार ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की रक्षा प्रणाली और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना है। पिछले कुछ दिनों में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। कई देशों ने इस बढ़ते संघर्ष पर चिंता जताई है और इसे बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलने की आशंका व्यक्त की है।
इस संघर्ष का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार भी प्रभावित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन फिलहाल हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।









