
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती मांग का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। Zoho के फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने चेतावनी दी है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश के कारण मेमोरी, CPU, GPU और दूसरे हार्डवेयर की लागत बढ़ रही है। इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की कीमतों पर पड़ सकता है।
AI डेटा सेंटर बढ़ा रहे हार्डवेयर की मांग
AI मॉडल को ट्रेन और रन करने के लिए बड़े डेटा सेंटर की जरूरत होती है। इनमें बड़ी संख्या में GPU, CPU, मेमोरी और स्टोरेज के साथ भारी कूलिंग और बिजली व्यवस्था चाहिए।
वेम्बू के मुताबिक AI निवेश की तेज रफ्तार ने इलेक्ट्रिक पावर, ट्रांसफॉर्मर, बैकअप जनरेटर, कूलिंग सिस्टम, मेमोरी, CPU और GPU जैसे कई बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।
इसका असर खास तौर पर मेमोरी चिप्स पर दिखाई दे रहा है। AI डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की मांग बढ़ने से सामान्य मेमोरी की सप्लाई पर भी दबाव पड़ सकता है।
12 महीने में मेमोरी की कीमतों में बड़ा उछाल
श्रीधर वेम्बू ने मेमोरी की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मेमोरी उत्पादों की कीमतों में पिछले 12 महीनों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। वेम्बू का कहना है कि बढ़ती मेमोरी और AI टोकन लागत ने कारोबार चलाना मुश्किल कर दिया है।
अगर RAM और दूसरे कंपोनेंट महंगे होते हैं, तो स्मार्टफोन और लैपटॉप बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। कंपनियां कुछ समय तक यह अतिरिक्त खर्च खुद उठा सकती हैं, लेकिन लागत लंबे समय तक ऊंची रहने पर उसका असर ग्राहकों की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।
AI टेक्नोलॉजी नहीं, निवेश का बुलबुला चिंता की वजह
वेम्बू ने AI को असफल तकनीक नहीं बताया है। उनकी चिंता AI के आसपास हो रहे भारी निवेश और क्रेडिट आधारित खर्च को लेकर है। उन्होंने मौजूदा AI निवेश चक्र की तुलना 1990 के दशक के टेलीकॉम बूम से की है।
उनका मानना है कि AI तकनीक लंबे समय में सफल हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि AI में निवेश करने वाली हर कंपनी सफल रहे। उन्होंने निवेशकों और कंपनियों को तकनीक की वास्तविक क्षमता और निवेश के उत्साह के बीच अंतर समझने की सलाह दी है।
आम यूजर पर क्या पड़ेगा असर?
अगर मेमोरी, प्रोसेसर और अन्य कंपोनेंट की लागत बढ़ती है, तो नए फोन और लैपटॉप की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर ज्यादा RAM और स्टोरेज वाले डिवाइसेज पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्मार्टफोन और लैपटॉप तुरंत महंगा हो जाएगा। कीमतों पर कंपनियों की रणनीति, सप्लाई, मांग और कंपोनेंट की लागत जैसे कई कारक असर डालते हैं।
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