
बनवार: उप तहसील क्षेत्र में रबी सीजन की कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने का सिलसिला तेज हो गया है। प्रशासन द्वारा स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद किसान खुलेआम फसल अवशेषों में आग लगा रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ नियमों की अनदेखी भी सामने आ रही है।
ब्रांणवाणी को मिली जानकारी के अनुसार हार्वेस्टिंग के बाद खेतों में बचे अवशेषों को हटाने के लिए किसान आग का सहारा ले रहे हैं। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन इसके दुष्परिणामों के बावजूद इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।लोगों का कहना है कि नरवाई जलाने से मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और जमीन की उर्वरता प्रभावित होती है। साथ ही, लाभकारी जीव भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे कृषि उत्पादन पर दीर्घकालीन असर पड़ता है।
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प्रशासन द्वारा प्रतिबंध के बावजूद जबेरा क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में यह गतिविधि जारी है, जिससे यह कार्रवाई कागजों तक सीमित नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि कई किसान रात के समय नरवाई जलाते हैं, ताकि कार्रवाई से बचा जा सके।तेज गर्मी और हवाओं के बीच खेतों में लगाई गई आग कभी भी विकराल रूप ले सकती है, जिससे गांवों तक आग फैलने का खतरा बना रहता है।
एसडीएम छोटे गिरी गोस्वामी ने बताया कि नरवाई जलाने के एक मामले में कार्रवाई की गई है। साथ ही पटवारियों और ग्राम स्तर के कर्मचारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो इसका असर मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और पशुधन पर गंभीर रूप से पड़ेगा।
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