
भोपाल/आदित्य शंकर तिवारी: भोपाल में विकास को नई दिशा देने की पहल सामने आई है। भोपाल सीएसआर फंड संरक्षण योजना के तहत कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने औद्योगिक इकाइयों के साथ बैठक कर झीलों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर दिया। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण और शहर के समग्र विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
झीलों और धरोहरों पर फोकस
बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शहर की पहचान उसकी झीलों और ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ी है, इसलिए इनके संरक्षण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सीएसआर फंड के माध्यम से झील किनारे वृक्षारोपण, पार्कों का पुनर्विकास और पुराने कुओं-बावड़ियों का संरक्षण किया जाए। इसके साथ ही मियावाकी तकनीक से हरित क्षेत्र बढ़ाने की बात भी कही गई। यह तकनीक कम समय में घने जंगल तैयार करने में मदद करती है, जिससे पर्यावरण को तेजी से लाभ मिलता है। इस पहल से शहर की सुंदरता बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है।
सामाजिक और शहरी विकास को बढ़ावा
बैठक में केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि सामाजिक विकास पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने वृद्धाश्रम, दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूल और ग्रामीण क्षेत्रों में मॉडल स्कूल बनाने जैसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके अलावा खेल सुविधाओं के विकास के लिए मेट्रो और फ्लाईओवर के नीचे स्पोर्ट्स टर्फ बनाने जैसे नवाचारों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और कार्य समय पर पूरे हों। औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से शहर में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
भोपाल में सीएसआर फंड के जरिए शुरू की गई यह पहल शहर के पर्यावरण और विकास दोनों के लिए अहम साबित हो सकती है। यदि योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले समय में भोपाल एक और बेहतर और संतुलित शहर के रूप में सामने आ सकता है।
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