
नई दिल्ली:
आज देश का आम नागरिक जब अपनी बाइक या कार की टंकी भरवाने पेट्रोल पंप पर जाता है, तो उसे ‘विकास’ की असली और कड़वी हकीकत समझ आती है। जहाँ दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को राहत दी है, वहीं भारत की भाजपा सरकार जनता की जेब काटने में व्यस्त है। आज ब्रांडवानी समाचार आपके सामने लाया है आंकड़ों का वो काला चिट्ठा, जिसे मुख्यधारा का मीडिया आपसे छिपा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में समय-समय पर भारी गिरावट आई है। अमेरिका, चीन और यहाँ तक कि हमारे पड़ोसी देशों ने भी कच्चे तेल के दाम गिरने पर उसका लाभ जनता को दिया। लेकिन भारत में कहानी उल्टी है।
- भारत में वृद्धि: 2014 के मुकाबले आज पेट्रोल और डीजल के दामों में 40% से 60% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- सरकार का तर्क बनाम हकीकत: सरकार अक्सर अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बहाना बनाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को इस कदर बढ़ा दिया है कि कच्चा तेल सस्ता होने पर भी आम आदमी को महंगा तेल ही खरीदना पड़ रहा है। यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका है।
भाजपा सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का खूब ढिंढोरा पीटा, लेकिन आंकड़े कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। 2014 से लेकर 2026 तक, भारत से विदेशी संस्थागत निवेशकों का पलायन लगातार जारी है।
| कालखंड | निवेशकों की स्थिति | प्रभाव |
| 2014 – 2019 | शुरुआती उत्साह के बाद गिरावट | नीतिगत अनिश्चितता |
| 2020 – 2023 | भारी बिकवाली | अस्थिर बाजार और जटिल टैक्स ढांचा |
| 2024 – 2026 | ऐतिहासिक गिरावट | निवेशकों का भारतीय बाजार पर से भरोसा टूटा |
विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल औसतन विदेशी निवेश की विकास दर में 15% से 20% की गिरावट देखी गई है। निवेशक अब भारत के बजाय अन्य एशियाई बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2014 में जब सत्ता परिवर्तन हुआ, तब देश की जीडीपी विकास दर एक मजबूत स्थिति में थी। लेकिन आज स्थिति भयावह है:
- गिरावट का प्रतिशत: नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण GST के बाद से देश की जीडीपी विकास दर में लगातार गिरावट आई है। कई तिमाहियों में यह ऐतिहासिक निचले स्तर (यहाँ तक कि माइनस में) तक जा पहुंची।
- आज 2026 में, वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2014 के मुकाबले लगभग 3% से 4% तक नीचे गिर चुकी है, जो देश की आर्थिक रीढ़ टूटने का संकेत है।
भाजपा सरकार ने 2014 में महंगाई कम करने और काला धन वापस लाने का वादा किया था। लेकिन आज हकीकत यह है कि:
- आम आदमी महंगे तेल और महंगाई से त्रस्त है।
- विदेशी निवेशक देश छोड़कर भाग रहे हैं।
- अर्थव्यवस्था (GDP) वेंटिलेटर पर है।
ब्रांडवानी समाचार सरकार से सवाल पूछता है— क्या यही वो ‘अच्छे दिन’ हैं जिनका वादा आपने देश की मासूम जनता से किया था? यह विकास नहीं, बल्कि जनता के साथ किया गया एक ऐतिहासिक विश्वासघात है।
ब्यूरो रिपोर्ट: ब्रांडवानी समाचार








