7 साल बाद उत्तर कोरिया की धरती पर कदम रखेंगे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग; क्या रूस-उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकियों को साधने की है बीजिंग की बड़ी चाल?

बीजिंग/प्योंगयांग: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कल यानी सोमवार से उत्तर कोरिया की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर प्योंगयांग पहुंचेंगे। वर्ष 2019 के बाद यह पहला मौका है जब चीनी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया के दौरे पर जा रहे हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील यात्रा के दौरान शी जिनपिंग की मुलाकात उत्तर कोरियाई सर्वोच्च नेता किम जोंग उन से होगी, जहां दोनों शक्तिशाली नेता द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे।

रूस से बढ़ती नजदीकियों के बीच चीन का बड़ा कूटनीतिक कदम

वैश्विक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा का मुख्य और दूरगामी उद्देश्य चीन और उत्तर कोरिया के बीच के पारंपरिक रणनीतिक व सैन्य संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना है। दरअसल, पिछले कुछ समय में उत्तर कोरिया की रूस के साथ बढ़ती सैन्य और कूटनीतिक नजदीकियों के बाद यह अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि बीजिंग और प्योंगयांग के रिश्तों में कुछ दूरी आई है।

हालांकि, पिछले वर्ष सितंबर में किम जोंग उन की चीन यात्रा और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई उनकी द्विपक्षीय वार्ता ने इन कयासों पर विराम लगाते हुए दोनों देशों की पुरानी दोस्ती को फिर से मजबूत करने के स्पष्ट संकेत दे दिए थे। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस प्योंगयांग यात्रा को “ऐतिहासिक” करार दिया है। सिन्हुआ के मुताबिक, इस शीर्ष स्तरीय बैठक से दोनों साम्यवादी देशों के भावी संबंधों के विकास के लिए एक नई और मजबूत रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) तैयार होगी।

वैश्विक समीकरणों को साधने की कवायद

चीनी राष्ट्रपति का यह उत्तर कोरिया दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वे हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग उच्चस्तरीय शिखर बैठकें कर चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि चीन वैश्विक मंच पर महाशक्ति के रूप में अपने कूटनीतिक प्रभाव को और अधिक धार देने के साथ-साथ उत्तर कोरिया के साथ अपने रणनीतिक गठजोड़ को एक नई दिशा देना चाहता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा उत्तर कोरिया अपने आर्थिक सहयोग और व्यापार के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भरता बनाए रखना चाहता है। साथ ही, अमेरिका द्वारा एक बार फिर वार्ता की इच्छा जताए जाने के बीच प्योंगयांग कूटनीतिक सौदेबाजी के लिए बीजिंग के मजबूत बैकअप को और पुख्ता करने की कोशिश में है।

परमाणु निरस्त्रीकरण से इनकार, सुरक्षा पर टिकी दुनिया की नजरें

इस महा-दौरे से ठीक पहले प्योंगयांग से एक बड़ा और कड़ा बयान भी सामने आया है। किम जोंग उन की बेहद प्रभावशाली बहन किम यो जोंग ने उत्तर कोरिया की परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की स्थिति को एक बार फिर दुनिया के सामने दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में किसी भी प्रकार के परमाणु निरस्त्रीकरण की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उत्तर कोरिया के इस आक्रामक रुख के बीच अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा, मिसाइल परीक्षणों और परमाणु मुद्दों को लेकर शी जिनपिंग और किम जोंग उन की इस मुलाकात से वैश्विक बिरादरी को क्या संदेश मिलता है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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