पीओके में बदतर होते हालात पर ब्रिटिश सांसद ने जताई गहरी चिंता, विदेश सचिव यवेट कूपर को पत्र लिखकर कहा- ‘अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे ब्रिटिश कश्मीरी’

लंदन: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में लगातार बिगड़ते हालात और मानवाधिकारों के हनन को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाजें उठने लगी हैं। ब्रिटेन के वरिष्ठ सांसद इमरान हुसैन ने ब्रिटिश विदेश सचिव यवेट कूपर को एक आधिकारिक पत्र लिखकर पीओके के मौजूदा तनावपूर्ण माहौल और वहां लगाए गए कड़े प्रतिबंधों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सांसद ने इस मामले में ब्रिटिश सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है।

कम्युनिकेशन ब्लैकआउट से बढ़ी ब्रिटिश कश्मीरियों की परेशानी

सांसद इमरान हुसैन ने अपने पत्र में पीओके में जारी सख्त लॉकडाउन और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर लगी पाबंदियों का प्रमुखता से उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा, “हम पीओके से हाल ही में आ रही उन रिपोर्टों को लेकर बेहद चिंतित हैं, जिनमें कहा गया है कि बड़े पैमाने पर लागू लॉकडाउन, बढ़ते तनाव और इंटरनेट व मोबाइल सेवाओं पर लगी पाबंदियों के कारण वहां के स्थानीय लोग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गए हैं।” उन्होंने आगे बताया कि ब्रिटेन में रहने वाले बड़ी संख्या में कश्मीरी मूल के नागरिकों ने उनसे संपर्क किया है। इन ब्रिटिश नागरिकों का कहना है कि वे पीओके में रह रहे अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों से चाहकर भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इस कम्युनिकेशन ब्लैकआउट की वजह से ब्रिटिश कश्मीरियों में अपने परिवारों की सुरक्षा और भलाई को लेकर भारी चिंता, घबराहट और मानसिक परेशानी का माहौल बना हुआ है।

ब्रिटिश नागरिकों की गिरफ्तारी और मानवाधिकारों के हनन पर उठाए सवाल

ब्रिटिश सांसद ने वहां हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन और बुनियादी नागरिक अधिकारों के दमन पर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि पीओके में ब्रिटिश नागरिकों की कथित गिरफ्तारी, संचार माध्यमों पर जबरन रोक और स्थानीय प्रशासन व ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत टूटने की खबरें बेहद परेशान करने वाली हैं। संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल में इंटरनेट या अन्य संचार सेवाओं को बंद करना केवल अनिश्चितता को बढ़ाता है, जिससे जनता का भरोसा कम होता है और स्थिति और ज्यादा हिंसक व अनियंत्रित हो जाती है।

शांतिपूर्ण संवाद और संयम बरतने की अपील

सांसद इमरान हुसैन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उभरे गंभीर विवादों और बुनियादी मानवाधिकारों से जुड़ी चिंताओं का समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत, आपसी संयम और प्रदर्शनकारियों के साथ सही संवाद के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी और संचार माध्यमों तक पहुंच ऐसे आवश्यक सिद्धांत हैं जो किसी भी तनावपूर्ण माहौल में स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने सभी पक्षों से इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को तुरंत बहाल करने तथा तनाव को कम करने के लिए सार्थक संवाद शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

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