फ्रांस में भीषण गर्मी से 1000 लोगों की मौत, यूरोप के 16 देशों में रिकॉर्डतोड़ तापमान; सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद, जंगलों में लगी आग

यूरोप इस समय दशकों की सबसे भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। फ्रांस में हीटवेव के कारण अब तक करीब 1,000 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, इटली, पुर्तगाल, ग्रीस समेत 16 यूरोपीय देशों में तापमान ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लगातार बढ़ती गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई शहरों में सड़कें पिघलने लगी हैं, स्कूलों को बंद करना पड़ा है और जंगलों में लगी भीषण आग पर काबू पाने के लिए हजारों दमकलकर्मी लगातार अभियान चला रहे हैं।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। सामान्यतः अपेक्षाकृत ठंडे रहने वाले देशों में भी इतनी अधिक गर्मी ने लोगों को हैरान कर दिया है। बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

फ्रांस के कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है। लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई है। वहीं स्पेन और पुर्तगाल में जंगलों में लगी आग ने हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। तेज हवाओं और अत्यधिक तापमान के कारण आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। कई गांवों को एहतियातन खाली कराया गया है।

ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में भी गर्मी का असर बुनियादी ढांचे पर साफ दिखाई दे रहा है। कुछ इलाकों में सड़कों की सतह पिघलने लगी है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है, क्योंकि अत्यधिक गर्मी के कारण रेलवे ट्रैक के फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई शहरों में स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है या बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गई हैं।

जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार बढ़ रही वैश्विक गर्मी और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण इस तरह की चरम मौसम घटनाएं अब अधिक बार देखने को मिल रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक तापमान में वृद्धि को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं।

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gaurav singh rajput

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