Glory Review: बॉक्सिंग रिंग में मर्डर मिस्ट्री का पंच, पुलकित-दिव्येंदु ने लूटी महफिल; Glory देखते ही बोलेंगे- ये सीरीज है या बारूद का गोदाम, हर एपिसोड में धमाका

ब्रांणवाणी रिव्यू: OTT पर अगर आप वही पुराने पुलिस-चोर वाले खेल से बोर हो चुके हैं, तो Glory आपके लिए ताज़ा झटका साबित हो सकती है। यहां रिंग में सिर्फ मुक्के नहीं चलते, बल्कि रिश्ते टूटते हैं, खून बहता है और राज खुलते हैं।

ये कहानी हरियाणा की मिट्टी से निकली है, जहां इज्जत, गुस्सा और जीत—तीनों की कीमत बहुत भारी है। एक कोच है, जिसका सपना है ओलंपिक गोल्ड। दो बेटे हैं, जिनके अंदर बाप के लिए प्यार कम और दर्द ज्यादा है। फिर एक कत्ल होता है… और कहानी सीधी बॉक्सिंग से निकलकर क्राइम थ्रिलर बन जाती है।

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क्या है असली मजा?

सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका माहौल है। देसी टोन, हरियाणवी तासीर और छोटे शहर की राजनीति—सब कुछ रियल लगता है। कहीं बाप-बेटे की तकरार, कहीं प्यार की कीमत, कहीं बदले की आग. कहानी कई मोर्चों पर लड़ती है। पहले दो एपिसोड ऐसा हुक मारते हैं कि आप छोड़ नहीं पाएंगे। जैसे-जैसे कहानी बढ़ती है, हर किरदार शक के घेरे में आता है। कौन अपना, कौन दुश्मन… यही खेल मजेदार बनाता है।

सीरीज का असली मजा दमदार अभिनय 

दिव्येंदु शर्मा फिर साबित करते हैं कि वो साधारण रोल को भी खास बना देते हैं। उनका अंदाज खतरनाक और असरदार है। लेकिन एक उनकी एक्टिंग का रेज सब जानते है, पर Glory सीरीज में दिव्येंदु शर्मा ने लगभग मिर्जापुर के मुन्ना भाईया का ही रोल जैसा निभाया है. 

पुलकित सम्राट इस बार सिर्फ हीरो नहीं लगे, एक्टिंग भी की है. वहीं धुरंधर मेजर इकबाल के पिता ब्रिगेडियर जहांगीर का किरदार निभाने वाले एक्टर सुविंदर विक्की स्क्रीन पर आते ही कहानी का लेवल ऊपर उठा देते हैं। सुविंदर विक्की ने क्या लाजवाब किरदार निभाया है. कई मौकों पर दिव्येंदु शर्मा और पुलकित सम्राट पर भारी पड़े है

कहाँ खाई पंच?

सीरीज बीच में थोड़ी लंबी लगती है। हालाकि एपिसोट की संख्या सात है। जिसकी लेंथ 40 से 45 मीनिट की है. ब्रांणवाणी का मानना है कि एपिसोट की संख्या 6 तक हो सकती थी. पर इसका मतलब ये नही की सीरीज बोर है. लेकिन कुछ ट्रैक ऐसे लगते हैं जैसे बस टाइम भरने के लिए डाले गए हों। अगर एडिटिंग थोड़ी टाइट होती, तो असर और बड़ा होता।

सीरीज देखें या नहीं?

अगर आपको देसी ड्रामा + सस्पेंस + इमोशनल टकराव पसंद है, तो यह सीरीज टाइमपास नहीं, अच्छा टाइम दे सकती है।

ब्रांणवाणी का फाइनल फैसला –  (3.8/5)

कलाकार: दिव्येंदु, पुलकित सम्राट, सुविंदर विक्की, जन्नत जुबैर, आशुतोष राणा, सिकंदर खेर, सयानी गुप्ता, यशपाल शर्मा, कश्मीरा परदेशी और कुणाल ठाकुर

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Rashel Kachwah Rajput

Rashel Kachwah Rajput

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