
राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे से जुड़े एक चर्चित मामले में नया मोड़ सामने आया है। जानकारी के अनुसार एक आईजीपी अधिकारी द्वारा आरोपी एएसपी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की मांग करते हुए पत्र लिखा गया है। यह मामला पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे प्रशासनिक गलियारों में काफी गंभीरता से देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह पूरा प्रकरण एक पुराने और बहुचर्चित विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसमें एएसपी समेत कई अधिकारियों की भूमिका की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर लंबे समय से निगाहें टिकी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में आरोपी एएसपी के साथ-साथ पांच आईएएस अधिकारियों के नाम भी पूर्व में सामने आए थे। जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों द्वारा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में आरोपी अधिकारी के खिलाफ चालान प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए नियमानुसार अभियोजन स्वीकृति आवश्यक मानी जाती है। यही कारण है कि संबंधित स्तर पर औपचारिक पत्राचार तेज हो गया है और विभागीय कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी वह पत्र भी माना जा रहा है जो आईजीपी अधिकारी द्वारा अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने के उद्देश्य से विभाग के प्रमुख को भेजा गया है। हालांकि इस पत्र के जवाब में आरोपी एएसपी ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि वह केंद्र सरकार के अधीन आने वाले अधिकारी हैं। ऐसे में उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया राज्य स्तर पर नहीं बल्कि केंद्र सरकार के माध्यम से पूरी की जानी चाहिए। इस जवाब के बाद मामले ने नया प्रशासनिक और कानूनी आयाम ग्रहण कर लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल संबंधित विभागों द्वारा नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं पूरे घटनाक्रम पर प्रशासनिक हलकों, राजनीतिक गलियारों और आम जनता की नजर बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई इस बहुचर्चित मामले को किस दिशा में ले जाती है।
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