
एंटरटेनमेंट डेस्क: भारतीय ओटीटी OTT स्पेस में समाज की कुप्रथाओं, व्यवस्था (सिस्टम) की संड़ाध, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता को उजागर करने वाला रियलिस्टिक कंटेंट हमेशा से दर्शकों की पहली पसंद रहा है। इसी कड़ी में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर इस शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म “कर्तव्य” ढोंगी बाबाओं के साम्राज्य, अंधभक्ति के दलदल, बाल यौन शोषण Child Sexual Abuse और ऑनर किलिंग (झूठी शान के लिए हत्या) जैसे बेहद संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दों को एक साथ उठाती है।
उलझी हुई और दोतरफा संकट की कहानी
फिल्म की कहानी हरियाणा के काल्पनिक कस्बे झामली के पुलिस अफसर पवन मलिक (सैफ अली खान) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक पत्रकार के मर्डर केस की जांच कर रहा है। पवन ऐसा इंसान है जो ड्यूटी, परिवार और सिस्टम के बीच बुरी तरह फंसा हुआ है।
मामला धीरे-धीरे पॉलिटिक्स, धार्मिक ताकत और गांव की गंदी सच्चाइयों तक पहुंचता है। इसी बीच उसके अपने घर में भी बड़ा संकट खड़ा हो जाता है। उसका छोटा भाई प्रेम विवाह कर भाग जाता है। मामला जाति और इज्जत की लड़ाई में बदल जाता है। दोनों को इस व्यवस्था की संड़ाध से बचा पाएगा या नहीं, यही फिल्म की आगे की पूरी कहानी है।
फिल्म की असली जान सैफ अली खान
अभिनय के मोर्चे पर यह फिल्म पूरी तरह से सैफ अली खान के कंधों पर टिकी है और उन्होंने निराश नहीं किया है। पवन के किरदार में सैफ ने न केवल हरियाणवी लहजे को बहुत ही बारीकी से पकड़ा है, बल्कि एक लाचार पुलिस अफसर के भीतर का गुस्सा, बेबसी, बेचैनी, कमजोरी और हताशा को अपनी आंखों और हाव-भाव से पर्दे पर जीवंत कर दिया है। सैफ के बाद जिस कलाकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, वह हैं बाल कलाकार युद्धवीर अहलावत। उन्होंने एक डरे हुए और प्रताड़ित नाबालिग लड़के के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
साथी कलाकरों का दमदार फोमेंस
सहयोगी कलाकारों में जाकिर हुसैन, संजय मिश्रा और मनीष चौधरी जैसे अनुभवी अभिनेताओं ने अपनी छोटी भूमिकाओं में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। रसिका दुग्गल और दुर्गेश कुमार (देखरेख और स्थानीय पुट के लिए) अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ पूरा न्याय करते नजर आते हैं। हालांकि, एक मुख्य खलनायक और पाखंडी बाबा के तौर पर सौरभ द्विवेदी अभिनेता के रूप में काफी कमजोर और बेअसर साबित हुए हैं; उनके किरदार की लिखावट और प्रस्तुति दोनों में वो खौफनाक ठसक गायब दिखी जो एक मजबूत थ्रिलर के लिए जरूरी होती है। बाकी के अन्य सह-कलाकारों ने अपने-अपने छोटे दृश्यों में सधा हुआ काम किया है।
फिल्म को देखें या न देखें
‘कर्तव्य’ कोई ऐतिहासिक या कल्ट क्लासिक फिल्म तो नहीं बन पाई है, लेकिन यह निश्चित रूप से एक ‘एवरेज क्राइम ड्रामा’ है। यदि आप सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्में, सिचुएशनल थ्रिलर और सैफ अली खान के संजीदा अभिनय के मुरीद हैं, तो आप वीकेंड पर नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म को एक बार आराम से देख सकते हैं। यदि आप बहुत ज्यादा गहरी स्क्रिप्ट या किसी बड़े सस्पेंस की उम्मीद लेकर नहीं जाएंगे, तो यह फिल्म आपको क्लीन और रियलिस्टिक एंटरटेनमेंट के मामले में निराश नहीं करेगी।
फिल्म की अवधि – 1 घंटा 49 मिनिट
ब्रांणवाणी का अतिंम फैसला – 2.5/5 स्टार
कलाकर: सैफ अली खान, युद्धवीर अहलावत, सौरभ द्विवेदी (पत्रकार), रसिका दुग्गल, संजय मिश्रा
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