
नई दिल्ली/गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले मुक्केबाज लक्ष्य फोगाट ने ताशकंद में आयोजित एशियाई अंडर-17 मुक्केबाजी चैंपियनशिप के 75 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीतकर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शानदार और प्रेरणादायक शुरुआत की है। एक शिक्षक परिवार से आने वाले लक्ष्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं और उनका कोई बॉक्सिंग बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन दिल्ली की एक बॉक्सिंग अकादमी में सीनियर खिलाड़ियों को देखकर उन्होंने इस खेल को अपना जुनून बना लिया।
इस चैंपियनशिप में लक्ष्य 13 भारवर्गों (पुरुष और महिला) के भारतीय दल में से फाइनल में पहुंचने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज रहे। फाइनल मुकाबले में उन्हें उज्बेकिस्तान के मारूफजोन तोशपुलातोव से 5-0 से हार का सामना करना पड़ा और वे रजत पदक पर सिमट गए। हालांकि, फाइनल से पहले लक्ष्य ने अपने से मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ लगातार शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने चीनी ताइपे के चेंग-एन ली को 5-0 से शिकस्त दी और फिर सेमीफाइनल के एक बेहद कड़े मुकाबले में कोरिया के स्युंगमिन ली पर एकतरफा और धमाकेदार जीत दर्ज कर फाइनल का टिकट पक्का किया था।
ताशकंद से विशेष बातचीत में लक्ष्य ने बताया कि रिंग के भीतर वे मुक्कों के साथ-साथ अपने दिमाग का भी भरपूर इस्तेमाल करते हैं। वे विरोधी की लंबाई और तकनीक के हिसाब से अपना गेम प्लान बदलते हैं; छोटे कद के बॉक्सर के खिलाफ जहां वे आक्रामक होकर खेलते हैं, वहीं लंबे बॉक्सर के खिलाफ वे काउंटर-अटैकिंग गेम अपनाते हैं। लक्ष्य ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने शुरुआती कोच स्वतंत्र राज सिंह, माता-पिता के अटूट समर्थन और भारत की अंडर-17 टीम के मुख्य कोच विनोद कुमार के मार्गदर्शन को दिया है। मुख्य कोच विनोद कुमार ने भी युवा मुक्केबाजों के लिए इस अंतरराष्ट्रीय दौरे को एक बेहतरीन एक्सपोजर बताया और भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के सहयोग की सराहना करते हुए जमीनी स्तर पर तकनीक और अनुशासन को मजबूत करने पर जोर दिया।
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