
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने अपने कार्यकाल का सफल एक वर्ष पूरा होने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी लखनऊ में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में यूपी पुलिस ने बीते एक साल में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। पुलिस ने पिछले साल तय की गई 10 मुख्य प्राथमिकताओं को केंद्र में रखकर जमीनी स्तर पर काम किया, जिसमें सबसे ज्यादा ध्यान ‘नागरिक केंद्रित’ व्यवस्थाओं पर दिया गया। अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत की गई कठोरतम कार्रवाई के चलते पिछले 7-8 वर्षों की तुलना में प्रदेश के ग्राफ़ में अपराधों में भारी कमी दर्ज की गई है।
महिला सुरक्षा के लिए ‘मिशन शक्ति’ लाया बड़ा बदलाव; पीड़िता से जेल भेजने के बाद भी संपर्क
डीजीपी राजीव कृष्णा ने जोर देते हुए कहा कि महिला सुरक्षा मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और उत्तर प्रदेश पुलिस इसमें देश भर में नोडल एजेंसी के रूप में लीड रोल निभा रही है। प्रदेश में संचालित ‘मिशन शक्ति’ अभियान के माध्यम से कानून-व्यवस्था में व्यापक स्तर पर बड़े सकारात्मक परिवर्तन किए गए हैं। पुलिसकर्मियों को इसके लिए विशेष ट्रेनिंग दी गई है, जिसके तहत वे दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और अल्पवयस्क बालिकाओं से जुड़े मामलों में समाज को जागरूक (Aware) कर रहे हैं।
डीजीपी ने बताया कि ऐसे सामाजिक अपराधों पर सामान्यतः पुलिस बहुत ज्यादा इंपैक्ट नहीं डाल पाती थी, लेकिन अब पुलिस की प्रभावी कार्रवाई के बाद भी ‘फॉलोअप एक्शन’ लिया जाता है। छेड़छाड़ और महिला संबंधी अपराधों के मामलों में आरोपियों को जेल भेजने के बाद भी यूपी पुलिस पीड़ित महिलाओं से लगातार संपर्क बनाए रखती है। इसी का परिणाम है कि पिछले 6 महीनों में इस मिशन के तहत महिला अपराधों में 9.5% से लेकर 33% तक की भारी कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा थाने और चौकियों पर जवाबदेही तय की गई है। ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से आने वाली शिकायतों के त्वरित निस्तारण के चलते सभी सरकारी पोर्टलों पर अब शिकायतों में 28% की कमी आई है, जो स्थानीय स्तर पर बेहतर समाधान को दर्शाता है।
साइबर अपराध रोकने में यूपी देश में अव्वल; ₹450 करोड़ की भारी धनराशि की गई फ्रीज
कोविड काल के बाद से बढ़े डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराधों पर बोलते हुए डीजीपी ने कहा कि यूपी पुलिस को आधुनिकतम ट्रेनिंग से लैस किया गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय की एजेंसी के समन्वय से उत्तर प्रदेश पुलिस के लगभग 62,000 कर्मियों को साइबर अपराधों की बारीक पहलुओं की विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है। ट्रेनिंग देने के मामले में उत्तर प्रदेश आज पूरे देश में अव्वल और अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। यूपी पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए साइबर ठगों द्वारा जालसाजी की गई ₹450 करोड़ की भारी-भरकम धनराशि को फ्रीज (Freeze) कराया है, जो पूरे देश में किसी भी राज्य पुलिस द्वारा की गई सबसे बड़ी कार्रवाई है। हेडक्वार्टर लेवल पर साइबर सेफ्टी, इंटरनेट अटैक और हैकिंग से निपटने के लिए केंद्रीय स्तर पर एक बड़ा वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूट बनाने की तैयारी भी जोर-शोर से चल रही है।
इसके साथ ही, यूपी पुलिस ‘यक्ष ऐप’ (Yaksha App) नामक एक अत्याधुनिक एआई (AI) प्रोग्राम का उपयोग कर रही है। इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम के माध्यम से अपराधियों के वॉयस (आवाज), टैक्स और अन्य डिजिटल माध्यमों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसी फेस रिकॉग्निशन और एआई तकनीक के बल पर हाल ही में कई बड़े फरार अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है।
पुलिस वेलफेयर: शहीद परिवारों को ₹137 करोड़ की मदद, 51 हजार को मुफ्त इलाज
डीजीपी ने कहा कि यूपी पुलिस देश के सबसे बड़े पुलिस परिवारों में से एक है, इसलिए पुलिसकर्मियों का कल्याण हमारी मुख्य प्राथमिकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के विशेष समन्वय और बीमा कवर के माध्यम से सड़क हादसों व विभिन्न घटनाओं में शहीद/मृत हुए पुलिसकर्मियों के आश्रित परिवारों को कुल ₹137 करोड़ की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। इसके अलावा प्रदेश के 51,000 पुलिसकर्मियों को पूरी तरह मुफ्त मेडिकल (चिकित्सा) सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पुलिस जवानों के रहने के लिए प्रदेश में 200 की क्षमता वाले आधुनिक छात्रावास (Hostels) भी प्रस्तावित किए गए हैं।
सड़कों के सुधार से बढ़े हादसे, अब सभी 1,600 थानों में तैनात होगी विशेष टीम
मुख्यमंत्री सड़क दुर्घटनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। डीजीपी ने स्वीकार किया कि प्रदेश में सड़कें बहुत अच्छी और एक्सप्रेस-वे स्तरीय हुई हैं, जिसके कारण वाहनों की रफ्तार बढ़ने से एक्सीडेंट के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। लेकिन जब से पुलिस ने एक्सीडेंट के ब्लैक स्पॉट और आंकड़े लेना शुरू किया है, तब से स्थिति में सुधार हुआ है। अब जिला स्तर पर जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी काम करती है, जिससे दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है। जल्द ही प्रदेश के सभी 1,600 थाना क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। हाल ही में संपन्न हुए ‘पुलिस मंथन’ सेमिनार में मुख्यमंत्री ने इन कार्यक्रमों को सुनकर पुलिस को अपना बहुमूल्य मार्गदर्शन दिया है।
नए कानून (BNS) से 60 से 90 दिनों में भेजी जा रही चार्जशीट, ‘ई-सम्मन’ व्यवस्था लागू
डीजीपी ने बताया कि इस वर्ष विशेष तौर पर दो बड़ी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। 3 वर्ष पहले (1 जुलाई 2024 को) आईपीसी और सीआरपीसी को बदलकर लागू किए गए नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को त्वरित और सुगम न्याय दिलाना है। इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस बल को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है। अब यूपी पुलिस नए प्रावधानों के तहत महज 60 से 90 दिनों के भीतर कोर्ट में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों को एकत्रित करना, एफएसएल (FSL) में तेजी से जांच को आगे बढ़ाना और ‘ई-साक्ष्य’ को केस डायरी से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
न्याय व्यवस्था को और आधुनिक बनाते हुए अब ‘ई-सम्मन’ (E-Summon) पर काम शुरू हो चुका है। पहले सम्मन कोर्ट के माध्यम से मैन्युअल जाते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत कोर्ट से ई-सम्मन डायरेक्ट थानों के डिजिटल पोर्टल पर आएंगे। वीडियोग्राफी और डिजिटल माध्यमों से ई-सम्मन को पोर्टल पर पूरी तरह लागू किया जा रहा है और अब तक 90% मामलों में ई-सम्मन की आधुनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है।
सीमा पार से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने की साजिश; 12-13 आतंकी धरे
डीजीपी राजीव कृष्णा ने संगठित और व्हाइट कॉलर अपराधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए पुलिस और अधिक प्रभावी ढंग से कठोरतम कार्रवाई करेगी, जिससे व्यापारियों और महिलाओं के मन में सुरक्षा का भरोसा और मजबूत हो सके। आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए डीजीपी ने बताया कि अब सीमा पार बैठे देश विरोधी तत्व सोशल मीडिया के जरिए यूपी के स्थानीय युवाओं से संपर्क कर उन्हें गुमराह करने और जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इस बेहद गंभीर खतरे को देखते हुए यूपी एटीएस (ATS) और एसटीएफ (STF) ने शुरुआती दौर में ही बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 से 13 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर बड़ी साजिशों को नाकाम किया है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था में किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
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