
सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 24,311 नए पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है। इन भवनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, जिनमें कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, फर्नीचर, पेयजल और स्वच्छता जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन पंचायत भवनों को अब ग्रामीण प्रशासन का स्थायी केंद्र माना जा रहा है, जहां पंचायत स्तर के सभी महत्वपूर्ण कार्य संपन्न किए जा रहे हैं।
ग्राम सचिवालयों की स्थापना के बाद ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं गांव में ही उपलब्ध हो रही हैं। इसके अलावा पेंशन योजनाओं की जानकारी, मनरेगा से जुड़े कार्य, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी यहीं से मिल रहा है। इससे न केवल लोगों का समय बच रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से भी राहत मिली है।
सरकार ने पंचायत व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर की तैनाती की गई है, जिससे ऑनलाइन कार्यों में तेजी आई है। इसके साथ ही 1875 रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और कंसल्टिंग इंजीनियरों को भी सिस्टम से जोड़ा गया है ताकि विकास कार्यों की तकनीकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जियो-फेंस्ड और क्यूआर कोड आधारित भुगतान प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत ग्राम पंचायतों को भेजी जाने वाली धनराशि का उपयोग सीधे ग्राम सचिवालय में स्थापित कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से किया जाता है। इससे खर्च की निगरानी आसान हुई है और भ्रष्टाचार की संभावना कम होने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल के जरिए व्यय की निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
ग्रामीण सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य स्तरीय कॉल सेंटर और ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम भी शुरू किया गया है। इससे शिकायतों का त्वरित समाधान और कर्मचारियों की उपस्थिति पर सख्त निगरानी संभव हो सकी है। कुल मिलाकर सरकार का दावा है कि यह पूरी व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन को मजबूत करने, सेवाओं को तेज और पारदर्शी बनाने तथा गांवों को आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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