
प्रदेश के एक बड़े विभाग में इन दिनों करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर अंदरखाने हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार विभाग में काम कर रही एक आउटसोर्स कंपनी के बिलों को लेकर एमडी स्तर पर नाराजगी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से प्रस्तुत किए गए बिलों में कुछ ऐसे खर्च शामिल थे, जिन्हें लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठाए गए। मामला इतना बढ़ गया कि वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा शुरू हो गई और अब यह पूरे विभाग में चर्चा का विषय बन चुका है।
सूत्रों के मुताबिक संबंधित कंपनी ने विभाग को कई करोड़ रुपये का बिल सौंपा था। हालांकि एमडी साहब ने बिल की राशि और उसमें शामिल कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई। चर्चा है कि उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधियों को स्पष्ट संकेत दिए कि बिल में संशोधन किए बिना भुगतान संभव नहीं होगा। बताया जा रहा है कि विभागीय अधिकारियों को भी इस पूरे मामले में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कंपनी की ओर से भी लगातार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें की जा रही हैं।
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एमडी साहब का रवैया शुरुआत से ही काफी सख्त रहा है। कहा जा रहा है कि उन्होंने साफ शब्दों में यह संकेत दिया कि विभागीय नियमों और प्रक्रियाओं से समझौता नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि कंपनी पर अब नए सिरे से दस्तावेज और खर्च का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का दबाव बढ़ गया है। विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा तो संबंधित कंपनी का काम किसी दूसरी एजेंसी को सौंपा जा सकता है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभाग और कंपनी दोनों ही सार्वजनिक तौर पर ज्यादा कुछ बोलने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। प्रशासनिक गलियारों में इसे केवल भुगतान विवाद नहीं, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही से जुड़े बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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