MP हाईकोर्ट का POCSO मामले में अहम फैसला, आरोपी को संदेह का लाभ देकर किया बरी

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO से जुड़े एक मामले में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों का परीक्षण करते हुए अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को संदेह से परे साबित किए जाने के आधार पर फैसला सुनाया।

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग से जुड़े POCSO मामले में आरोपी को राहत देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया है। मामला इंदौर क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। हाईकोर्ट के फैसले में अदालत ने मामले में सामने आए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत तथ्यों का परीक्षण किया।

POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत दर्ज मामलों में अदालत साक्ष्यों की विश्वसनीयता और आरोपों के प्रमाण को विशेष रूप से देखती है। किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुरूप साबित करना होता है।

इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष उपलब्ध रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर विचार किया गया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।

अदालत ने आपराधिक न्याय व्यवस्था के उस मूल सिद्धांत को भी ध्यान में रखा, जिसके तहत यदि अभियोजन के साक्ष्यों में ऐसा संदेह रह जाता है जिसे उचित आधार पर दूर नहीं किया जा सकता, तो उसका लाभ आरोपी को दिया जाता है।

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फैसले के बाद आरोपी को मामले में दोषमुक्त कर दिया गया। हालांकि, POCSO जैसे संवेदनशील मामलों में किसी आरोपी के बरी होने का अर्थ यह नहीं होता कि अदालत ने घटना के घटित होने की संभावना को सामान्य रूप से नकार दिया है; बल्कि फैसला संबंधित मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन द्वारा आरोप सिद्ध करने की क्षमता के आधार पर होता है।

यह फैसला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया में साक्ष्य जुटाने तथा उन्हें अदालत के समक्ष विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर मामले में हाईकोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु सामने आए हैं। मूल फैसले के विस्तृत आदेश और उसमें दर्ज साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद ही अदालत की टिप्पणियों और निर्णय के कानूनी आधार को पूरी तरह समझा जा सकता है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO मामले में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत का फैसला मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को संदेह से परे साबित किए जाने के कानूनी मानक पर आधारित है।

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  • MP High Court important decision POCSO case, acquitted accused benefit doubt
Srota Swati Tripathy

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