
सार
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। परंपरा के अनुसार सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी अर्पित की गई। भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने भगवान महाकाल को विशेष राखी बांधी। इसके बाद बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया, जिसे श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।
विस्तार
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन का पर्व श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया गया। सावन पूर्णिमा के अवसर पर तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को सबसे पहले राखी अर्पित की गई।
परंपरा के अनुसार उज्जैन में रक्षाबंधन की शुरुआत बाबा महाकाल को राखी बांधने के बाद मानी जाती है। पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई राखी भगवान महाकाल को अर्पित की गई। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, पंचामृत अभिषेक और श्रृंगार किया गया।
इस बार बाबा महाकाल के लिए करीब 2 फीट लंबी विशेष राखी तैयार की गई थी। पुजारी परिवार की महिलाओं ने धार्मिक परंपरा के अनुसार इस राखी को तैयार किया। राखी बनाने में रेशम के धागों, आभूषणों और सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
रक्षाबंधन के इस विशेष आयोजन का दूसरा प्रमुख आकर्षण सवा लाख लड्डुओं का महाभोग रहा। मंदिर में तैयार किए गए 1.25 लाख लड्डुओं का भोग बाबा महाकाल को अर्पित किया गया। इसके बाद महाप्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
लड्डुओं के निर्माण में सामग्री की शुद्धता और धार्मिक पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सवा लाख लड्डुओं को तैयार करने में करीब 15 क्विंटल बेसन, 10 क्विंटल शुद्ध घी, 15 क्विंटल शक्कर बूरा और 2 क्विंटल मेवे का उपयोग किया गया।
भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया। रक्षाबंधन के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना में शामिल हुए। मंदिर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा।
महाकाल मंदिर की यह परंपरा रक्षाबंधन को उज्जैन की धार्मिक संस्कृति से जोड़ती है। मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल को उज्जैन का राजाधिराज माना जाता है और इसी कारण सबसे पहले उन्हें रक्षासूत्र अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा महाकाल को राखी बांधने के बाद श्रद्धालुओं ने अपने परिवारों के साथ पर्व मनाया। मंदिर में हुए विशेष आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ उज्जैन की सांस्कृतिक परंपरा को भी दर्शाया।
उज्जैन में रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल को सबसे पहली राखी अर्पित करने की परंपरा इस वर्ष भी निभाई गई। विशेष राखी, भस्म आरती और सवा लाख लड्डुओं के महाभोग ने पर्व को खास बना दिया। महाभोग का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
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