
पिछोर, शिवपुरी (रानू परिहार की रिपोर्ट): रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पिछोर सब-जेल में भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का भावुक दृश्य देखने को मिला। जेल की चारदीवारी के बीच भी रिश्तों की मिठास और अपनापन कायम रहा। अपने बंदी भाइयों से मिलने पहुंचीं बहनों ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था के बीच भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और उनकी सुखद, सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सुबह से ही पिछोर सब-जेल परिसर के बाहर बहनों और परिजनों की आवाजाही शुरू हो गई थी। हाथों में राखी, मिठाई और रोली-चावल की थाली लिए बहनें अपने भाइयों से मिलने के लिए उत्सुक नजर आईं। रक्षाबंधन को देखते हुए जेल प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए परिजनों को बारी-बारी से बंदियों से मुलाकात कराई गई।
राखी बांधते ही नम हुईं कई आंखें
रक्षाबंधन के लिए जेल पहुंचीं कई बहनों ने लंबी दूरी तय कर अपने भाइयों से मुलाकात की। जैसे ही बहनों ने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, माहौल भावुक हो गया। कई भाई-बहनों की आंखें नम हो गईं। बहनों ने भाइयों का हालचाल जाना, माथे पर तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। उन्होंने भाइयों के जल्द घर लौटने और बेहतर भविष्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। वहीं बंदी भाइयों ने भी बहनों के प्रति आभार जताया और कठिन परिस्थितियों में साथ देने के लिए भावुक होकर माफी मांगी।
“भाई चाहे जहां हो, बहन के लिए वही रहता है”
एक बंदी की बहन ने बताया कि भाई चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, बहन के लिए वह हमेशा उसका भाई ही रहता है। राखी बांधकर उन्हें सुकून मिला। वहीं एक बंदी ने कहा कि जेल में रहते हुए परिवार की सबसे ज्यादा कमी महसूस होती है। बहन के राखी बांधने से ऐसा लगा जैसे पूरा परिवार उनके पास आ गया हो। उन्होंने कहा कि यह राखी उन्हें खुद को सुधारने और बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देगी।
सुरक्षा के बीच हुई मुलाकात
जेल सूत्रों के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर बड़ी संख्या में बंदियों के परिजन उनसे मिलने पहुंचे। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की मौजूदगी से जेल परिसर में पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल बना रहा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई। मुलाकात के दौरान किसी भी आपत्तिजनक वस्तु को जेल परिसर के भीतर ले जाने से रोकने के लिए विशेष जांच की गई।
परिजनों से मुलाकात से बंदियों को मिलता है भावनात्मक संबल
जेल प्रशासन के अनुसार, त्योहारों के अवसर पर बंदियों को उनके परिजनों से मिलवाने से उनमें सामाजिक जुड़ाव और सुधार की भावना मजबूत होती है। परिवार से मिलने का अवसर बंदियों को भावनात्मक संबल देता है और उन्हें सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है। रक्षाबंधन का यह आयोजन भी इसी भावना के साथ किया गया, जिसमें बंदियों को अपने परिवार और रिश्तों से जुड़ने का अवसर मिला।
पिछोर सब-जेल में रक्षाबंधन का यह आयोजन इस बात की भावुक तस्वीर पेश कर गया कि परिस्थितियां और दूरियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और अपनापन कायम रहता है। जेल की चारदीवारी के बीच बहनों द्वारा बांधी गई राखी बंदियों के लिए परिवार से जुड़ाव, भावनात्मक सहारे और नई उम्मीद का प्रतीक बन गई।
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