
बुरहानपुर: एक ओर सरकार जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है और बुरहानपुर जिले को देश में सबसे पहले ‘हर घर नल से जल’ पहुंचाने वाले जिले का तमगा भी मिल चुका है, लेकिन जिले के आदिवासी बाहुल्य धूलकोट क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें इन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं। यहां ग्राम पंचायत भगवानिया के रेखालिया झिरा फालिया में रहने वाले आदिवासी परिवार आज भी पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि मासूम बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 25 फीट गहरे कुएं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा है।
धूलकोट क्षेत्र के रेखालिया झिरा फालिया में लगभग 45 आदिवासी परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो नियमित पेयजल व्यवस्था है और न ही स्वच्छ पानी की कोई वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध है। पूरे फालिया के लोग एकमात्र पुराने कुएं के पानी पर निर्भर हैं। भीषण गर्मी के कारण कुएं का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिसके चलते बच्चों और महिलाओं को रस्सियों के सहारे कुएं के अंदर उतरकर पानी निकालना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुएं का पानी भी साफ नहीं है, लेकिन मजबूरी में वही पानी पीना और घरेलू उपयोग में लेना पड़ रहा है। ग्रामीण बुजुर्ग ज्ञान सिंह ने बताया कि सरकार हर घर तक पानी पहुंचाने की बात करती है, लेकिन यहां लोग आज भी कुएं में उतरकर पानी भरने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जरा सी चूक होने पर बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत और प्रशासन को कई बार कुएं के गहरीकरण और स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि यदि समय रहते कुएं का गहरीकरण करा दिया जाता तो बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर पानी नहीं भरना पड़ता। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और पानी के टैंकर भी नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण महिला कोनू बाई ने बताया कि गांव के लोग वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं है और गंदा पानी पीने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन मजबूरी में उसी पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। वहीं गांव के बच्चों राजेश और गनसिंह ने बताया कि उन्हें रोज कुएं में उतरकर पानी भरना पड़ता है। बच्चों ने कहा कि कुएं में उतरते समय डर लगता है, लेकिन पानी लाना मजबूरी है। उन्होंने प्रशासन से कुएं के गहरीकरण और नियमित टैंकर व्यवस्था की मांग की।
मामले को लेकर कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी ने जिला प्रशासन और पंचायत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों की लगातार अनदेखी की जा रही है और सरकार केवल कागजों में योजनाएं चला रही है, जबकि जमीनी हालात बेहद खराब हैं। उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में तत्काल स्थायी पेयजल व्यवस्था की जाए।
वहीं प्रशासन की ओर से सृजन श्रीवास्तव ने कहा कि मामले की जानकारी ली जा रही है और जल्द वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। एसडीएम भागीरथ वाखला ने भी ग्रामीणों को राहत पहुंचाने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार ‘हर घर नल से जल’ का दावा कर चुकी है, तब भी आदिवासी क्षेत्र के बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर गंदा पानी भरने को क्यों मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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