म्यांमार टेरर ट्रेनिंग केस: पटियाला हाउस कोर्ट ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों की न्यायिक हिरासत 30 दिन बढ़ाई, बंद कमरे में हुई सुनवाई

नई दिल्ली। म्यांमार टेरर ट्रेनिंग मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 6 यूक्रेनी नागरिकों और 1 अमेरिकी नागरिक की न्यायिक हिरासत को 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। सभी आरोपियों को सुरक्षा कारणों से तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया।

यह सुनवाई विशेष NIA अदालत (स्पेशल जज प्रशांत शर्मा) में हुई, जिसे संवेदनशील मामले को देखते हुए बंद कमरे (in-camera proceedings) में रखा गया। अदालत ने यूक्रेन और अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को सुनवाई में मौजूद रहने की अनुमति नहीं दी, और स्पष्ट किया कि प्रक्रिया कानून के अनुसार ही चलेगी।

क्या है मामला?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अनुसार, ये सभी विदेशी नागरिक म्यांमार में सक्रिय एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (EAGs) को हथियार, ड्रोन टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग देने में शामिल थे। आरोप है कि ये समूह भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं। NIA ने इन आरोपियों पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) की धारा 18 के तहत टेरर साजिश का मामला दर्ज किया है। एजेंसी का दावा है कि ये लोग भारत को ट्रांजिट रूट बनाकर अवैध रूप से म्यांमार गए और वहां ड्रोन व जामिंग टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी।

अदालत में क्या हुआ?

  • सभी 7 आरोपियों को 30 दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत में भेजा गया
  • अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक के वकील ने स्वास्थ्य आधार पर जमानत का विरोध किया
  • यूक्रेनी नागरिकों के वकीलों ने ई-मुलाकात और परिवार से संपर्क की अनुमति मांगी
  • कोर्ट ने कहा कि विशेष कानून के तहत ऐसी अनुमति देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है

NIA का पक्ष

NIA ने अदालत में कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और जांच अभी शुरुआती चरण में है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि:

  • आरोपी भारत क्यों आए
  • क्या वे म्यांमार के विद्रोही समूहों से जुड़े थे
  • क्या ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल ट्रेनिंग के लिए किया गया
  • क्या किसी भारतीय या आतंकी नेटवर्क से इनका संबंध है

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    Rashel Kachwah Rajput

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