ईरान की अमेरिका को खुली चुनौती: ‘बीजिंग में विजयी होकर प्रवेश करने का सपना न देखें ट्रंप, कूटनीति में भी देंगे मात’

तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक अपने दूसरे कार्यकाल की पहली चीन यात्रा पर रहेंगे। इस बहुप्रतीक्षित दौरे से पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराने और सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए जाने के बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

ट्रंप गलतफहमी में जीते है – ईरान 

ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई के सलाहकार अली अकबर विलायती ने कहा है कि ट्रंप को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वे बीजिंग में “विजेता” बनकर प्रवेश करेंगे। तस्नीम न्यूज एजेंसी के जरिए जारी बयान में विलायती ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका को युद्ध के मैदान में हराया है और कूटनीतिक मोर्चे पर भी उसे सफल नहीं होने देगा।

ईरान ने कहा – शांति कमजोरी नही, ताकत है

दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बीच संघर्षविराम की स्थिति भी संकट में नजर आ रही है। ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर को “मैसिव लाइफ सपोर्ट” पर बताया है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात गंभीर बने हुए हैं। दोनों देशों की ओर से इस अहम समुद्री मार्ग को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। ईरान ने साफ कहा है कि उसकी शांति की नीति को कमजोरी न समझा जाए।

इसी बीच चीन ने ट्रंप की यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह वैश्विक स्थिरता के लिए अमेरिका के साथ काम करने को तैयार है। माना जा रहा है कि चीन इस पूरे घटनाक्रम में बैकचैनल वार्ताकार की भूमिका निभा रहा है। हालांकि बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थता की बात स्वीकार नहीं की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में चीन की अहम भूमिका रही है।

ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में व्यापारिक और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। एजेंडे में टैरिफ विवाद कम करना, रेयर अर्थ खनिजों की सप्लाई, चीनी कंपनियों को बाजार पहुंच, बोइंग विमानों की खरीद और अमेरिकी कृषि उत्पादों से जुड़े व्यापारिक समझौते शामिल हैं। इसके अलावा ताइवान और परमाणु सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है।

ये भी पढ़े – बीजिंग दौरे से पहले ट्रंप को अपनों ने ही चेताया: हेरिटेज फाउंडेशन ने खींची ‘रेड लाइन’, कहा- चीन के सामने न झुकें राष्ट्रपति

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    Rashel Kachwah Rajput

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