बीजिंग दौरे से पहले ट्रंप को अपनों ने ही चेताया: हेरिटेज फाउंडेशन ने खींची ‘रेड लाइन’, कहा- चीन के सामने न झुकें राष्ट्रपति

बीजिंग/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित चीन दौरे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली संभावित शिखर वार्ता से पहले अमेरिका के प्रभावशाली थिंक टैंक ‘हेरिटेज फाउंडेशन’ ने एक अहम रिपोर्ट जारी की है। ‘प्रोजेक्ट 2025’ की रूपरेखा तैयार करने वाले इस संगठन ने ट्रंप प्रशासन को चीन के साथ बातचीत के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति पर विस्तार से सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट में जहां कुछ मुद्दों पर समझौते की सलाह दी गई है, वहीं कई मामलों में सख्त रुख बनाए रखने को कहा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को चीन के साथ दुर्लभ खनिजों यानी ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ के मुद्दे पर सावधानी से बातचीत करनी चाहिए। चीन वैश्विक स्तर पर करीब 90 प्रतिशत रेयर अर्थ सप्लाई को नियंत्रित करता है, जिनका उपयोग मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और स्मार्टफोन निर्माण में होता है। हेरिटेज फाउंडेशन का मानना है कि ट्रंप को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चीन इन खनिजों के निर्यात पर नई पाबंदियां न लगाए।

थिंक टैंक ने अमेरिकी किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए चीन से कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने का मुद्दा भी उठाने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को अमेरिकी सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों का आयात बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, लेकिन इसके बदले अमेरिका को कोई रणनीतिक रियायत नहीं देनी चाहिए। रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन से चीन पर ईरान को समर्थन बंद करने के लिए दबाव बनाने को भी कहा गया है।

इसके अलावा हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक जिमी लाई, उइगर कार्यकर्ता गुलशन अब्बास और पादरी एज्रा जिन जैसे राजनीतिक और धार्मिक कैदियों की रिहाई का मुद्दा भी वार्ता में उठाने की सिफारिश की गई है। आव्रजन के मुद्दे पर भी हेरिटेज फाउंडेशन ने ट्रंप के सख्त रुख का समर्थन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को अमेरिका में चीनी नागरिकों के अवैध प्रवेश को रोकने में सहयोग करना चाहिए।

वहीं रिपोर्ट में कुछ ऐसे मुद्दों को ‘रेड लाइन’ बताया गया है, जहां ट्रंप को किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करने की सलाह दी गई है। इनमें सबसे प्रमुख ताइवान का मुद्दा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका को ताइवान के समर्थन से पीछे नहीं हटना चाहिए। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रंप पहले ही ताइवान को प्राथमिक मुद्दा न मानने के संकेत दे चुके हैं।

तकनीक के क्षेत्र में भी चीन के प्रति सख्ती बरतने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार चीन को अमेरिकी एडवांस टेक्नोलॉजी तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा एनवीडिया के H200 एआई चिप्स की चीन को बिक्री की अनुमति दिए जाने पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है और इसे अमेरिका के लिए रणनीतिक नुकसान बताया है। इसके अलावा रिपोर्ट में चीन पर लगाए गए टैरिफ को फिलहाल बरकरार रखने और चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों को अमेरिकी बाजार में प्रवेश से रोकने पर भी जोर दिया गया है। हेरिटेज फाउंडेशन का मानना है कि चीन के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा में ढील देना अमेरिका के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ हो सकता है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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