
नई दिल्ली/बेरूद: भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक ने वैश्विक मंच पर देश का गौरव बढ़ाते हुए प्रतिष्ठित ‘संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार अपने नाम कर लिया है। मेजर बराक को यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उन्हें विशेष रूप से बधाई और शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने इस उपलब्धि को भारतीय सेना की अनुकरणीय सेवा और संयुक्त राष्ट्र UN के शांति मिशनों में भारत के ऐतिहासिक योगदान का एक बड़ा प्रतीक बताया है।
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का हिस्सा हैं मेजर अभिलाषा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गौरवशाली उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए बताया कि मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के साथ तैनात हैं। वे वहां एक ‘एंगेजमेंट टीम कमांडर’ और ‘जेंडर फोकल प्वाइंट’ के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। युद्धग्रस्त और बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में उनकी भूमिका बेहद सराहनीय रही है, जिसके लिए उन्हें इस वैश्विक पुरस्कार से नवाजा गया है।
पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा- “देश की बेटियों के लिए प्रेरणा”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए मेजर अभिलाषा की सराहना की। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा: ‘‘मेजर अभिलाषा बराक को यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई। मेजर बराक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) में एक एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में कार्यरत हैं। यह सम्मान उनकी अनुकरणीय सेवा और संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा प्रयासों में भारत के दीर्घकालिक योगदान का सम्मान है। उनकी यह उपलब्धि अनगिनत युवा भारतीयों, विशेष रूप से हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा है जो देश और मानवता की सेवा करना चाहती हैं।’’
क्या है ‘यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट पुरस्कार’?
संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन सैन्य शांति सैनिकों Peacekeepers को पहचान और सम्मान देने के लिए शुरू किया गया था, जिन्होंने शांति अभियानों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 (महिला, शांति और सुरक्षा पर) के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ और साहसिक कार्य किया हो। मेजर अभिलाषा ने लेबनान के चुनौतीपूर्ण माहौल में स्थानीय महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ-साथ सैन्य अभियानों में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने का अद्भुत काम किया है।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत का ऐतिहासिक दबदबा
मेजर अभिलाषा बराक की यह सफलता वैश्विक स्तर पर भारत के शांति अभियानों के समृद्ध इतिहास को और मजबूत करती है। भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में अग्रणी रहा है। विशेष रूप से भारतीय महिला सैन्य अधिकारियों ने कांगो, लेबनान और सूडान जैसे बेहद अशांत क्षेत्रों में अपनी सूझबूझ और बहादुरी का लोहा मनवाया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर अभिलाषा की यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती ताकत और नेतृत्व क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
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