
मॉस्को: रूस ने मंगलवार को अपनी नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ‘सरमत’ का सफल परीक्षण कर पूरी दुनिया को अपनी परमाणु ताकत का अहसास कराया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस परीक्षण की सराहना करते हुए इसे “दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल” करार दिया। पुतिन के मुताबिक, यह मिसाइल इस साल के अंत तक रूसी सेना के बेड़े में शामिल हो जाएगी।
पश्चिमी देशों के लिए बड़ी चुनौती:
‘सरमत’ मिसाइल को पश्चिम में ‘Satan II’ के नाम से भी जाना जाता है। यह सोवियत काल की पुरानी ‘वोयेवोडा’ मिसाइलों की जगह लेगी। पुतिन ने दावा किया कि सरमत के वारहेड्स की शक्ति किसी भी पश्चिमी मिसाइल की तुलना में चार गुना अधिक है। इसकी मारक क्षमता इतनी अधिक है कि यह किसी भी मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है।
परमाणु हथियारों की नई रेस:
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब रूस और अमेरिका के बीच अंतिम परमाणु हथियार समझौता फरवरी में समाप्त हो चुका है। 50 से अधिक वर्षों में यह पहली बार है जब दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु संपन्न देशों के शस्त्रागार पर कोई सीमा लागू नहीं है। रूस अपनी परमाणु तिकड़ी (परमाणु पनडुब्बी, मिसाइल और बॉम्बर) को लगातार आधुनिक बना रहा है, जिसमें ‘एवंगार्ड’ हाइपरसोनिक वाहन और ‘पोसीडॉन’ अंडरवाटर ड्रोन जैसे घातक हथियार शामिल हैं।
पुतिन ने कहा सुरक्षा के लिए अनिवार्य
यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन ने इसे रूस की रणनीतिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा, “हमें नई वास्तविकताओं और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने को मजबूर होना पड़ा है।”
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