
उमरिया/राकेश दर्दवंशी की रिपोर्ट: घुनघुटी-पत्नार क्षेत्र में प्रस्तावित बजरंग पावर परियोजना को लेकर आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई अब गंभीर विवादों में घिर गई है। भारतीय किसान संघ और स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने जनसुनवाई से पहले ही ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई से कुछ दिन पहले से ही कंपनी का प्रबंधन क्षेत्र में सक्रिय था और लोगों को प्रभावित करने की कोशिश लगातार की जा रही थी, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया और प्रदूषण, जल संकट, खेती पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है तो क्षेत्र की कृषि व्यवस्था और पर्यावरण पर गहरा असर पड़ेगा।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब भारतीय किसान संघ ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई समाप्त होने के बाद कुछ अधिकारी शहडोल स्थित एक होटल में कंपनी द्वारा आयोजित भोजन कार्यक्रम में शामिल हुए। संगठन ने इसे गंभीर सवालों से जोड़ते हुए कहा कि जिस कंपनी पर ग्रामीण आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं, उसी कंपनी के आतिथ्य को स्वीकार करना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इसके साथ ही उपहार दिए जाने की चर्चाओं ने भी मामले को और तूल दे दिया है।
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि अगर जनसुनवाई वास्तव में निष्पक्ष थी तो फिर कंपनी द्वारा प्रभावित करने की कोशिशें और बाद में अधिकारियों की मेहमाननवाजी की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
इस बीच कंपनी पक्ष से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बजरंग पावर के मैनेजर जे.पी. द्विवेदी ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और बातचीत को टाल दिया। वहीं क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अशोक तिवारी से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं।
जिला पंचायत सदस्य हेमनाथ बेगाने ने भी कंपनी से अपने सभी वादों को लिखित रूप में सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया तो क्षेत्र में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। भारतीय किसान संघ ने इस पूरे मामले को लेकर सोमवार को शहडोल स्थित कमिश्नरी कार्यालय के घेराव की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि यदि जनसुनवाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा इसे बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
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